Imam Nasa'i : 4803
قَالَ الْحَارِثُ بْنُ مِسْكِينٍ قِرَاءَةً عَلَيْهِ وَأَنَا أَسْمَعُ عَنْ ابْنِ وَهْبٍ قَالَ سَمِعْتُ ابْنَ جُرَيْجٍ يُحَدِّثُ عَنْ عَمْرِو بْنِ شُعَيْبٍ عَنْ أَبِيهِ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَمْرٍو أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ تَعَافَوْا الْحُدُودَ فِيمَا بَيْنَكُمْ فَمَا بَلَغَنِي مِنْ حَدٍّ فَقَدْ وَجَبَ
इतिहास पढ़ि के हमका [अल हरिथ बिन मिस्किन] उपदेश दिहिस है अऊर हम [इब्न वाहब] से सुने रहेन, उ कहिन; 'मैंने [इब्नू जुरैज] से [अम्र बिन स्यूअैब] से [उनके पिता] से [अब्दुल्ला बिन अम्र] से बतावत सुना कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'आपके बीच सजा के मामलन मा एक दूसरे का माफ करौ काहे से कि जवन सजा मोर पास पहुँची है, ओका निभावै का चाही'।