Tafsir An-Nisa' (4);127 & 6 - keadilan dan ujian kedewasaan anak yatim
Imam Bukhari : 4234
حَدَّثَنَا عُبَيْدُ بْنُ إِسْمَاعِيلَ حَدَّثَنَا أَبُو أُسَامَةَ قَالَ حَدَّثَنَا هِشَامُ بْنُ عُرْوَةَ أَخْبَرَنِي أَبِي عَنْ عَائِشَةَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهَا{ يَسْتَفْتُونَكَ فِي النِّسَاءِ قُلْ اللَّهُ يُفْتِيكُمْ فِيهِنَّ إِلَى قَوْلِهِ وَتَرْغَبُونَ أَنْ تَنْكِحُوهُنَّ }قَالَتْ عَائِشَةُ هُوَ الرَّجُلُ تَكُونُ عِنْدَهُ الْيَتِيمَةُ هُوَ وَلِيُّهَا وَوَارِثُهَا فَأَشْرَكَتْهُ فِي مَالِهِ حَتَّى فِي الْعَذْقِ فَيَرْغَبُ أَنْ يَنْكِحَهَا وَيَكْرَهُ أَنْ يُزَوِّجَهَا رَجُلًا فَيَشْرَكُهُ فِي مَالِهِ بِمَا شَرِكَتْهُ فَيَعْضُلُهَا فَنَزَلَتْ هَذِهِ الْآيَةُ
हमसे कहिस है ['उबैद बिन इस्माइल] हमसे कहिस है [अबू उसामा] कहिन; हमसे [हिस्याम बिन उर्वाह] [ऐस्या रदलियाल्लाहु अन्हू] से अल्लाह के वचन के बारे मा [मेरे पिता] से कहिन है: अऊर उ लोग आपसे औरतन के बारे मा फतवा मांगत हैं। कहौ: 'अल्लाह ने तोहका ओनके बारे मा एक फतवा दिहिन, अऊर जवन कुरान मा तोहका पढ़ा गा रहा - उहौ एक फतवा - अनाथ औरतन के बारे मा कि तू ओनका उ नाहीं दिहा जवन ओनके लिए निर्धारित रहा, जब तू ओनसे शादी करै चाहत रहेव। -अन निसा: 127-। आयशा कहिन; -यह श्लोक- केहू के अनाथ औरत के सम्बन्ध मा प्रकट भा रहा। अनाथ औरत ओका अपने धन मा शामिल किहिस, इहाँ तक कि अपने खजूर के बगीचा के मामलन मा भी, फिर ऊ ओसे शादी करै चाहत रहा, ऊ अनाथ औरत का दूसर आदमी से शादी नाहीं करय चाहत रहा, यहिसे ऊ ओका अपने धन के देखभाल मा शामिल किहिस, जब तक कि ऊ ओसे शादी न कइके अऊर ओका दूसर आदमी से शादी न कइके ओकरे लिए मुश्किल नाहीं बना दिहिस। तौ श्लोक नीचे आवा।