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ISLAM AL-HAQ: QURAN & HADITH
(The True Islam)



An-nisaa'(4) 65. Tidak beriman hingga mereka menjadikan kamu hakim terhadap perkara yang mereka perselisihkan

Imam Bukhari : 4219

حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ جَعْفَرٍ أَخْبَرَنَا مَعْمَرٌ عَنْ الزُّهْرِيِّ عَنْ عُرْوَةَ قَالَخَاصَمَ الزُّبَيْرُ رَجُلًا مِنْ الْأَنْصَارِ فِي شَرِيجٍ مِنْ الْحَرَّةِ فَقَالَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ اسْقِ يَا زُبَيْرُ ثُمَّ أَرْسِلْ الْمَاءَ إِلَى جَارِكَ فَقَالَ الْأَنْصَارِيُّ يَا رَسُولَ اللَّهِ أَنْ كَانَ ابْنَ عَمَّتِكَ فَتَلَوَّنَ وَجْهُ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ ثُمَّ قَالَ اسْقِ يَا زُبَيْرُ ثُمَّ احْبِسْ الْمَاءَ حَتَّى يَرْجِعَ إِلَى الْجَدْرِ ثُمَّ أَرْسِلْ الْمَاءَ إِلَى جَارِكَ وَاسْتَوْعَى النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لِلزُّبَيْرِ حَقَّهُ فِي صَرِيحِ الْحُكْمِ حِينَ أَحْفَظَهُ الْأَنْصَارِيُّ كَانَ أَشَارَ عَلَيْهِمَا بِأَمْرٍ لَهُمَا فِيهِ سَعَةٌ قَالَ الزُّبَيْرُ فَمَا أَحْسِبُ هَذِهِ الْآيَاتِ إِلَّا نَزَلَتْ فِي ذَلِكَ{ فَلَا وَرَبِّكَ لَا يُؤْمِنُونَ حَتَّى يُحَكِّمُوكَ فِيمَا شَجَرَ بَيْنَهُمْ }

हमसे कहिस है [अली बिन अब्दुल्ला] हमसे कहिस है [मुहम्मद बिन जाफर] हमसे कहिस है [ममर] से [अज जुहरी] से [उर्वाह] कहिस; कि एक अंसार आदमी का अल हर्रा झरना के बारे मा अज़ जुबैर के साथे विवाद रहा। रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम तब कहिन: हे जुबैर, अपने बगीचे का पानी दे, ओकरे बाद अपने पड़ोसी का पानी दे'। लेकिन अंसार आदमी नाराज होकर बोला; 'हे अल्लाह के रसूल, का ई एहसे अहै कि ई आपके चाचा के बेटवा अहै!' तब रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का चेहरा लाल हो गया, फिर उन्होंने कहा: 'हे जुबैर अपने बगीचे को पानी दे, फिर जब तक पानी जमीन पर वापस न आ जाए तब तक पकड़े रखो फिर अपने पड़ोसी को दे दो!' पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का उम्मीद है कि जुबैर एक दृढ़ निर्णय के साथ अपने अधिकारन का समझ सकत हैं। भले ही पहिले उ जुबैर अऊर अंसार लोगन के लिए काम आसान बनाये रहे, लेकिन जब अंसार लोग रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम से नाराज रहे, तौ उ आखिरकार जुबैर का सब हिस्सा दइ दिहिन। [जुबैर] रदलियाल्लाहु अन्हू कहिन; 'अल्लाह के कसम, मैं सोचत हउँ कि ई आयत तब तक ना उतरी जब तक कि ई उ बात से संबंधित नाइ रही: 'त आपके प्रभु के कसम, उ - सार मा - तब तक विश्वास नाहीं करत जब तक कि उ आपका उ मामला का न्यायाधीश नाहीं बनावत हैं जेकरे ऊपर उ विवाद करत हैं, तब तक उ आपके द्वारा दिए गए निर्णय पर अपने दिल मा कौनो आपत्ति महसूस नाहीं करत हैं, अऊर उ ओका पूरी तरह से स्वीकार करत हैं। -क्यूएस; एक निसा`; 65-'.

Hadith Corroboration :

Imam Ahmad : 1345, 15532
Imam Bukhari : 2187, 2188, 2189, 2509, 4219
Imam Muslim : 4347
Imam Tirmidzi : 1283, 2953
Imam Nasa'i : 5312, 5321
Imam Ibnu Majah : 15, 2471