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ISLAM AL-HAQ: QURAN & HADITH
(The True Islam)



Imam Nasa'i : 1531

أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الْمُثَنَّى وَمُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ عَنْ مُحَمَّدٍ قَالَ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ عَنْ مَنْصُورٍ قَالَ سَمِعْتُ مُجَاهِدًا يُحَدِّثُ عَنْ أَبِي عَيَّاشٍ الزُّرَقِيِّ قَالَ شُعْبَةُ كَتَبَ بِهِ إِلَيَّ وَقَرَأْتُهُ عَلَيْهِ وَسَمِعْتُهُ مِنْهُ يُحَدِّثُ وَلَكِنِّي حَفِظْتُهُ قَالَ ابْنُ بَشَّارٍ فِي حَدِيثِهِ حِفْظِي مِنْ الْكِتَابِ أَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ كَانَ مُصَافَّ الْعَدُوِّ بِعُسْفَانَ وَعَلَى الْمُشْرِكِينَ خَالِدُ بْنُ الْوَلِيدِ فَصَلَّى بِهِمْ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ الظُّهْرَ قَالَ الْمُشْرِكُونَ إِنَّ لَهُمْ صَلَاةً بَعْدَ هَذِهِ هِيَ أَحَبُّ إِلَيْهِمْ مِنْ أَمْوَالِهِمْ وَأَبْنَائِهِمْ فَصَلَّى بِهِمْ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ الْعَصْرَ فَصَفَّهُمْ صَفَّيْنِ خَلْفَهُ فَرَكَعَ بِهِمْ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ جَمِيعًا فَلَمَّا رَفَعُوا رُءُوسَهُمْ سَجَدَ بِالصَّفِّ الَّذِي يَلِيهِ وَقَامَ الْآخَرُونَ فَلَمَّا رَفَعُوا رُءُوسَهُمْ مِنْ السُّجُودِ سَجَدَ الصَّفُّ الْمُؤَخَّرُ بِرُكُوعِهِمْ مَعَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ ثُمَّ تَأَخَّرَ الصَّفُّ الْمُقَدَّمُ وَتَقَدَّمَ الصَّفُّ الْمُؤَخَّرُ فَقَامَ كُلُّ وَاحِدٍ مِنْهُمْ فِي مَقَامِ صَاحِبِهِ ثُمَّ رَكَعَ بِهِمْ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ جَمِيعًا فَلَمَّا رَفَعُوا رُءُوسَهُمْ مِنْ الرُّكُوعِ سَجَدَ الصَّفُّ الَّذِي يَلِيهِ وَقَامَ الْآخَرُونَ فَلَمَّا فَرَغُوا مِنْ سُجُودِهِمْ سَجَدَ الْآخَرُونَ ثُمَّ سَلَّمَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ عَلَيْهِمْ

हमका [मुहम्मद बिन अल मुत्सना] अऊर [मुहम्मद बिन बसिस्यार] का [मुहम्मद] से रिपोर्ट करै के बाद उ कहिन; हमसे [मंसूर] से संबंधित है [स्यु'बाह] उ कहिन; हम [मुजाहिद] का [अबू अय्यासी अज़ जुराकी] से बतावत सुने रहेन, [स्यूबाह] कहिन; उ ई मोर लिए लिखे रहे अऊर हम ओका वापस पढ़ दिहे रहेन। हम भी ओनका कहत सुने हई, लेकिन हम रट लिहे हई। [इब्न बसिसियार] ने अपनी हदीस में कहा; मोर याद किताब से है, कि पैगम्बर शलल्लाहु अलैहि वा सल्लम एक बार उस्फान मा दुश्मन का सामना किहिन - मुशरकन के पंक्ति मा खालिद बिन वालिद रहे - इस्लाम धर्म अपनावै से पहिले, पैगम्बर शलल्लाहु अलैहि वा सल्लम अपने साथियन के साथे दोपहर के नमाज पढ़िन। मुशरक कहते हैं : 'उनके पास - मुसलमानों - के पास नमाज है जिसे वे अपने धन और बच्चों से ज्यादा प्यार करत हैं !' तब रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने अपने साथियों के साथ असर नमाज पढ़ी। अपने साथियन का अपने पीछे दुइ पंक्ति मा बनाइन, फिर सल्लल्लाहु 'अलैहि वा सल्लम प्रणाम किहिन' सबके साथ। जब उइ आपन माथा उठाइन, तौ उनके तुरंत पीछे वाली पंक्ति झुकि गै, जबकि दूसर पंक्ति खड़ी रही। और जब उन्होंने सजदा से माथा उठाया तो आखिरी पंक्ति वाले सजदा करके रसूलल्लाह शलल्लाहु अलैहि वा सल्लम के साथ प्रणाम किहिन। फिर सामने वाली पंक्ति पीछे जात है अऊर पीछे वाली आगे जात है, जेहिसे हर पंक्ति दूसर स्थिति - बारी-बारी से- कब्जा करत है। फिर उन सब के साथ पैगम्बर सल्लल्लाहु 'अलेहि व सल्लम प्रणाम किये'। झुकै से आपन माथा उठावै के बाद, उनके पीछे वाली पंक्ति झुक जात है, जबकि बाकी पंक्ति खड़ी रहत है। जब उइ सजदा खतम किहिन, तौ दूसर पंक्ति वाले खुदै सजदा किहिन। तब पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने उनका अभिवादन किया।