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इस्लाम अल-हक़: क़ुरआन और हदीस
(सच्चा इस्लाम)



Sujud sahwi: sujud dua kali sebelum atau setelah salam, ketika lupa rakaat shalat

इमाम नसाई : 1236

أَخْبَرَنَا بِشْرُ بْنُ هِلَالٍ قَالَ حَدَّثَنَا عَبْدُ الْوَارِثِ عَنْ هِشَامٍ الدَّسْتَوَائِيِّ عَنْ يَحْيَى بْنِ أَبِي كَثِيرٍ عَنْ أَبِي سَلَمَةَ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِذَا نُودِيَ لِلصَّلَاةِ أَدْبَرَ الشَّيْطَانُ لَهُ ضُرَاطٌ فَإِذَا قُضِيَ التَّثْوِيبُ أَقْبَلَ حَتَّى يَخْطُرَ بَيْنَ الْمَرْءِ وَقَلْبِهِ حَتَّى لَا يَدْرِيَ كَمْ صَلَّى فَإِذَا رَأَى أَحَدُكُمْ ذَلِكَ فَلْيَسْجُدْ سَجْدَتَيْنِ

उन्होंने कहा कि हमें [बिसिर बिन हिलाल] ने बताया है; उन्होंने हमें [अब्दुल वारित्स] ने [हिसाम अद दस्तवाई] से [याह्या बिन अबू कसीर] से [अबू सलमा] से [अबू हुरैरा] से बताया है; उन्होंने कहा; कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम ने कहा: "जब नमाज़ पढ़ ली जाती है, तो शैतान पादता हुआ भाग जाता है। अगर इकामा खत्म हो जाता है, तो शैतान फिर से किसी के दिल को लुभाने के लिए आता है ताकि उसे नमाज़ की रकात की गिनती का पता न चले! अगर तुममें से किसी को ऐसा हो, तो दो बार सजदा करे।"

समर्थक हदीस :

इमाम अहमद : 1568, 1587, 1656, 1661, 1669, 3385, 3389, 3420, 3786, 3827, 4016, 4118, 4186, 4199, 7070, 8649, 9099, 9401, 9545, 9551, 9660, 10351, 10467, 11264, 11356, 11367, 11403, 16308, 16310, 19022, 19111, 21853, 21854, 21855
इमाम बुखारी : 386, 389, 674, 1148, 1149, 1150, 1151, 1152, 1153, 1154, 1155, 1156, 3043, 5591, 6708, 6709
इमाम मुस्लिम : 883, 884, 885, 886, 887, 888, 889, 890, 891, 892, 893, 894, 895, 896, 897, 898, 899
इमाम अबू दाऊद : 857, 858, 859, 860, 861, 862, 863, 864, 865, 866, 867, 868, 869, 870, 871, 872, 873, 874, 875
इमाम तिर्मिदज़ी : 356, 357, 358, 359, 360, 361, 362, 363, 364, 365
इमाम नसाई : 1207, 1208, 1209, 1210, 1211, 1212, 1213, 1214, 1215, 1216, 1217, 1218, 1219, 1220, 1221, 1222, 1223, 1224, 1225, 1226, 1227, 1228, 1229, 1230, 1231, 1232, 1233, 1234, 1235, 1236, 1237, 1238, 1239, 1240, 1241, 1242, 1243, 1244
इमाम इब्नु माजा : 1193, 1194, 1195, 1196, 1197, 1198, 1199, 1200, 1201, 1202, 1203, 1204, 1205, 1206, 1207, 1208, 1209
इमाम मलिक : 198, 199, 200, 201, 202, 203, 208
इमाम दरिमी : 1456, 1457, 1458, 1459, 1460, 1461, 1462, 1463