Imam Bukhari : 4212
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ يُوسُفَ عَنْ وَرْقَاءَ عَنْ ابْنِ أَبِي نَجِيحٍ عَنْ عَطَاءٍ عَنْ ابْنِ عَبَّاسٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا قَالَكَانَ الْمَالُ لِلْوَلَدِ وَكَانَتْ الْوَصِيَّةُ لِلْوَالِدَيْنِ فَنَسَخَ اللَّهُ مِنْ ذَلِكَ مَا أَحَبَّ فَجَعَلَ لِلذَّكَرِ مِثْلَ حَظِّ الْأُنْثَيَيْنِ وَجَعَلَ لِلْأَبَوَيْنِ لِكُلِّ وَاحِدٍ مِنْهُمَا السُّدُسَ وَالثُّلُثَ وَجَعَلَ لِلْمَرْأَةِ الثُّمُنَ وَالرُّبُعَ وَللزَّوْجِ الشَّطْرَ وَالرُّبُعَ
हमका [मुहम्मद बिन यूसुफ] से [वर्का] से [इब्न अबू नजीह] से ['अथा] से [इब्न अब्बास रदलियाअल्लाहु अन्हुमा] से कहिन है; 'अतीत मा, संपत्ति बच्चन के लिए अऊर वसीयत माता-पिता के लिए रही। फिर अल्लाह ने अपनी इच्छा के अनुसार ओका खतम कर दिहिस अऊर ओका दुई औरतन के हिस्सा के तरह पुरुष के हिस्सा के साथ बदल दिहिस, दुइनौ माता-पिता के लिए हिस्सा हर एक का एक छठवां अऊर एक तिहाई मिलत रहा, पत्नी के लिए एक आठवां अऊर एक चौथाई, अऊर पति के लिए आधा अऊर एक चौथाई बन गवा'।