Imam Bukhari : 4020
حَدَّثَنِي إِسْحَاقُ أَخْبَرَنَا أَبُو عَامِرٍ الْعَقَدِيُّ حَدَّثَنَا قُرَّةُ عَنْ أَبِي جَمْرَةَ قُلْتُ لِابْنِ عَبَّاسٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَاإِنَّ لِي جَرَّةً يُنْتَبَذُ لِي نَبِيذٌ فَأَشْرَبُهُ حُلْوًا فِي جَرٍّ إِنْ أَكْثَرْتُ مِنْهُ فَجَالَسْتُ الْقَوْمَ فَأَطَلْتُ الْجُلُوسَ خَشِيتُ أَنْ أَفْتَضِحَ فَقَالَ قَدِمَ وَفْدُ عَبْدِ الْقَيْسِ عَلَى رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقَالَ مَرْحَبًا بِالْقَوْمِ غَيْرَ خَزَايَا وَلَا النَّدَامَى فَقَالُوا يَا رَسُولَ اللَّهِ إِنَّ بَيْنَنَا وَبَيْنَكَ الْمُشْرِكِينَ مِنْ مُضَرَ وَإِنَّا لَا نَصِلُ إِلَيْكَ إِلَّا فِي أَشْهُرِ الْحُرُمِ حَدِّثْنَا بِجُمَلٍ مِنْ الْأَمْرِ إِنْ عَمِلْنَا بِهِ دَخَلْنَا الْجَنَّةَ وَنَدْعُو بِهِ مَنْ وَرَاءَنَا قَالَ آمُرُكُمْ بِأَرْبَعٍ وَأَنْهَاكُمْ عَنْ أَرْبَعٍ الْإِيمَانِ بِاللَّهِ هَلْ تَدْرُونَ مَا الْإِيمَانُ بِاللَّهِ شَهَادَةُ أَنْ لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَإِقَامُ الصَّلَاةِ وَإِيتَاءُ الزَّكَاةِ وَصَوْمُ رَمَضَانَ وَأَنْ تُعْطُوا مِنْ الْمَغَانِمِ الْخُمُسَ وَأَنْهَاكُمْ عَنْ أَرْبَعٍ مَا انْتُبِذَ فِي الدُّبَّاءِ وَالنَّقِيرِ وَالْحَنْتَمِ وَالْمُزَفَّتِ
ई हमसे [इशाक] बतावा गा है ई हमसे [अबू अमीर अल अकादी] ई हमका [कुर्राह] से [अबू जमराह] से बतावा गा है, हम एक बार इब्न अब्बास से कहेन, 'वास्तव मा हमरे पास एक बर्तन है जेकर उपयोग नबीदज रस बनावै मा कीन जात है, फिर हम ओका मीठा पी लेत हई। अगर मैं बहुत ज्यादा पीत हउँ, तौ मैं लोगन के साथे घूमत हउँ - इधर-उधर बैठत हउँ - ताकि नशा मा न दिखै। [इब्नू अब्बास] तब कहिन, 'अबू कैस के दूत रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के पास आवा अहै, तब उ ओनका ई कहिके अभिवादन किहिन: 'दूतन का स्वागत है, जे घृणित अऊर पछतावा करै वाले लोगन मा से नाहीं हैं'। उन्होंने कहा कि हे अल्लाह के रसूल हमरे और आपके बीच मुदलार जनजाति के मुशर्की हैं, और हम आपसे हराम महीनों के अलावा नहीं मिल सकत हैं। तौ हमका एक हुकुम दइ द्या, अगर हम यहिके अभ्यास करब तौ हम स्वर्ग मा घुस सकित है, अऊर हम यहिका अपने बाद के लोगन तक पहुँचा सकित है'। उ कहिन: 'मैं तोहका चार चीजन के आज्ञा देत हउँ अऊर चार चीजन से मना करत हउँ। मैं तोहका अल्लाह पर भरोसा रखै का हुकुम देत हउँ। का तुम जानत हौ कि अल्लाह पर बिस्वास का होत है?' अर्थात्: 'गवाही दै कि अल्लाह के अलावा पूजा के लायक कौनो भगवान नाहीं है, नमाज पढ़ौ, जकात दौ, रमदलान के महीना मा रोजा रखौ अऊर घनिमा से आय का पांचवां हिस्सा खर्च करौ। अऊर हम तोहका चार चीजन से मना करत हई; अद दुबा, अन नकिर, अल हंतम अऊर अल मुजफत मा पैगम्बर के भावना बनाइन।