Rasulullah melarang nikah secara mut'ah
Imam Darimi : 2098
أَخْبَرَنَا جَعْفَرُ بْنُ عَوْنٍ عَنْ عَبْدِ الْعَزِيزِ بْنِ عُمَرَ بْنِ عَبْدِ الْعَزِيزِ عَنْ الرَّبِيعِ بْنِ سَبْرَةَ أَنَّ أَبَاهُ حَدَّثَهُ أَنَّهُمْ سَارُوا مَعَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فِي حِجَّةِ الْوَدَاعِ فَقَالَ اسْتَمْتِعُوا مِنْ هَذِهِ النِّسَاءِ وَالِاسْتِمْتَاعُ عِنْدَنَا التَّزْوِيجُ فَعَرَضْنَا ذَلِكَ عَلَى النِّسَاءِ فَأَبَيْنَ أَنْ لَا نَضْرِبَ بَيْنَنَا وَبَيْنَهُنَّ أَجَلًا فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ افْعَلُوا فَخَرَجْتُ أَنَا وَابْنُ عَمٍّ لِي مَعَهُ بُرْدٌ وَمَعِي بُرْدٌ وَبُرْدُهُ أَجْوَدُ مِنْ بُرْدِي وَأَنَا أَشَبُّ مِنْهُ فَأَتَيْنَا عَلَى امْرَأَةٍ فَأَعْجَبَهَا شَبَابِي وَأَعْجَبَهَا بُرْدُهُ فَقَالَتْ بُرْدٌ كَبُرْدٍ وَكَانَ الْأَجَلُ بَيْنِي وَبَيْنَهَا عَشْرًا فَبِتُّ عِنْدَهَا تِلْكَ اللَّيْلَةَ ثُمَّ غَدَوْتُ فَإِذَا رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَائِمٌ بَيْنَ الرُّكْنِ وَالْبَابِ فَقَالَ يَا أَيُّهَا النَّاسُ إِنِّي قَدْ كُنْتُ أَذِنْتُ لَكُمْ فِي الِاسْتِمْتَاعِ مِنْ النِّسَاءِ أَلَا وَإِنَّ اللَّهَ قَدْ حَرَّمَهُ إِلَى يَوْمِ الْقِيَامَةِ فَمَنْ كَانَ عِنْدَهُ مِنْهُنَّ شَيْءٌ فَلْيُخَلِّ سَبِيلَهَا وَلَا تَأْخُذُوا مِمَّا آتَيْتُمُوهُنَّ شَيْئًا
[अब्दुल अजीज बिन उमर बिन सबराह] सूं [अब्दुल अजीज बिन उमर बिन अब्दुल अजीज] सूं [अब्दुल अजीज बिन उमर बिन अब्दुल अजीज] सूं [अब्दुल अजीज बिन सबरा] सूं [उणरै पिता] नै बतायो गयो है कै [उणरै पिता] उणनै बतायो हो कै लोग एक बार हज वादा रै दौरान पैगम्बर सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम रै साथै चालता हा, फेर उण कह्यो: 'इण लुगायां रै साथै मौज करो! ' अर म्हारै हिसाब सूं मौज-मस्ती करणो ब्याव करणो है - एक निश्चित बगत माथै-, फेर म्हे लुगायां नै आ बात पेशकश करी, जाहिर तौर माथै बां म्हारै अर बां रै बिचाळै टेम्पो नीं देवण सूं मना कर दियो। फेर रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम बोल्या: 'करो'। फेर म्हैं काकै रै बेटै रै सागै बारै निकळ्यो, वो एक बुरदा लेय आयो- लास नै ढकबा रो कपड़ो- अर म्हैं एक बुरदा ल्यायो अर बां रो बुरदा म्हारै बुरदा सूं चोखो हो, पण म्हैं बां सूं छोटो हो। फेर म्हे एक लुगाई रै कनै गया, ओ ठाह लाग्यो कै वा लुगाई म्हारी जवानी नै देखर हैरान ही, पण वा म्हारै काकै रै टाबरां रै कपड़ां नै देखर हैरान रैयगी। लुगाई बोली; 'बुर्दा कपड़ो दूजा कपड़ा री तरै है'। इण बीच, म्हारै अर बां रै बिचाळै रो बगत दस दिनां रो हो। फेर म्हैं उण रात नै उणरै कनै रात बिताई। सवेरे मैं गयो, तो ठाह लाग्यो कै रसूलुल्लाह सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम खम्भा अर काबा रै दरवाजै रै बिचाळै खड़्यो हो। फेर बो बोल्यो: 'ओ लोग, पैली म्हैं थानै लुगायां सूं ब्याव करण री इजाजत दी ही। जाण ल्यो कै अल्लाह इणनै क़यामत रै दिन तांई मना कर दियो है। जिणरै कनै बां सूं कीं है, बो बांनै छोड़ देवै अर जको थै बांनै देवो बां मांय सूं कीं नीं लेवो'।