इमाम दरिमी : 1841
أَخْبَرَنَا جَعْفَرُ بْنُ عَوْنٍ حَدَّثَنَا إِسْمَعِيلُ بْنُ أَبِي خَالِدٍ قَالَ وَسَمِعْتُ ابْنَ أَبِي أَوْفَى يَقُولُ سَعَى رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بَيْنَ الصَّفَا وَالْمَرْوَةِ وَنَحْنُ نَسْتُرُهُ مِنْ أَهْلِ مَكَّةَ أَنْ يُصِيبَهُ أَحَدٌ بِحَجَرٍ أَوْ بِرَمْيَةٍ
हमें बताया है [जाफर बिन औन] ने हमें बताया है [इस्माईल बिन अबू खालिद], उन्होंने कहा; मैंने [इब्न अबू औफा] को यह कहते सुना; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने शफा और मरवा के बीच सई की, जबकि हमने इसे मक्का के लोगों से ढक दिया ताकि कोई उन पर पत्थर न फेंके या उन पर पत्थर न फेंके।