Imam Malik : 1229
حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ هِشَامِ بْنِ عُرْوَةَ عَنْ أَبِيهِأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ مَنْ أَحْيَا أَرْضًا مَيِّتَةً فَهِيَ لَهُ وَلَيْسَ لِعِرْقٍ ظَالِمٍ حَقٌّقَالَ مَالِك وَالْعِرْقُ الظَّالِمُ كُلُّ مَا احْتُفِرَ أَوْ أُخِذَ أَوْ غُرِسَ بِغَيْرِ حَقٍّ
याह्या द्वारा मलिक से [हिस्याम बिन उर्वाह] से [अपने पिता] से मुझसे कहा गया है कि रसूलुल्लाह सल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा है: 'जो कोई भी जमीन को जीवन देता है जो मर गई है तो वह उसकी है, और जो लोग गलत करत हैं - जमीन जब्त करत हैं - उनके पसीने से कोई अधिकार नहीं मिलत है'। मलिक कहिन; 'अनुचित पसीना कुछौ भी होत है जेका खोखला कीन जात है या बिना सही के लीन जात है या लगावा जात है'।