Imam Malik : 828
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ عَبْدِ الْمَلِكِ بْنِ قُرَيْرٍ عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ سِيرِينَ أَنَّ رَجُلًا جَاءَ إِلَى عُمَرَ بْنِ الْخَطَّابِفَقَالَ إِنِّي أَجْرَيْتُ أَنَا وَصَاحِبٌ لِي فَرَسَيْنِ نَسْتَبِقُ إِلَى ثُغْرَةِ ثَنِيَّةٍ فَأَصَبْنَا ظَبْيًا وَنَحْنُ مُحْرِمَانِ فَمَاذَا تَرَى فَقَالَ عُمَرُ لِرَجُلٍ إِلَى جَنْبِهِ تَعَالَ حَتَّى أَحْكُمَ أَنَا وَأَنْتَ قَالَ فَحَكَمَا عَلَيْهِ بِعَنْزٍ فَوَلَّى الرَّجُلُ وَهُوَ يَقُولُ هَذَا أَمِيرُ الْمُؤْمِنِينَ لَا يَسْتَطِيعُ أَنْ يَحْكُمَ فِي ظَبْيٍ حَتَّى دَعَا رَجُلًا يَحْكُمُ مَعَهُ فَسَمِعَ عُمَرُ قَوْلَ الرَّجُلِ فَدَعَاهُ فَسَأَلَهُ هَلْ تَقْرَأُ سُورَةَ الْمَائِدَةِ قَالَ لَا قَالَ فَهَلْ تَعْرِفُ هَذَا الرَّجُلَ الَّذِي حَكَمَ مَعِي فَقَالَ لَا فَقَالَ لَوْ أَخْبَرْتَنِي أَنَّكَ تَقْرَأُ سُورَةَ الْمَائِدَةِ لَأَوْجَعْتُكَ ضَرْبًا ثُمَّ قَالَ إِنَّ اللَّهَ تَبَارَكَ وَتَعَالَى يَقُولُ فِي كِتَابِهِ{ يَحْكُمُ بِهِ ذَوَا عَدْلٍ مِنْكُمْ هَدْيًا بَالِغَ الْكَعْبَةِ }وَهَذَا عَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ عَوْفٍ
ई [मुहम्मद बिन सिरिन] से [अब्दुल मलिक बिन कुरैर] से मलिक से मोका सुनावा गा रहा, जे कहिन, 'एक आदमी [उमर बिन खत्ताब] से मिला अऊर पूछिस, 'हम अऊर हमार दोस्त दुइ घोड़न के साथे दौड़ लगावत रहेन, फिर हम एक हिरन से टकराये रहेन, जब हम इहराम के स्थिति मा रहेन। फिर का सोचत हौ?' उमर ने [कउनो] से कहा, जे उनके बगल मा रहा, 'चलो हम ई घटना का दंडित करै के लिए ई पर चर्चा करित है! ' मुहम्मद बिन सिरिन कहिन; 'फिर दूनौ जने एक बकरी कै जुर्माना दइके सजा दिहिन। प्रश्नकर्ता कहिके चला गवा, 'काहे नाहीं दइ सकत ईमानदार सेनापति हिरन के मामले मा जब तक ऊ कउनौ अउर के साथ न होय! ' उमर ने सुना कि ऊ व्यक्ति का कहिस, फिर ओका बोलावा अऊर ओसे पूछा, 'का तुम सूरह अल मैदाह पढ़े हौ?' ऊ मनई जवाब दिहिस, 'नहीं'। उमर ने फिर पूछा, 'तुम जानत हौ कि ऊ आदमी कौन रहा जे हमसे ई घटना के बारे मा चर्चा किहिस?' ऊ मनई जवाब दिहिस, 'हमका नाहीं पता'। उमर बिन खत्ताब कहिन; 'अगर तुम मोका बतावत कि तुम सूरह अल मैदाह पढ़े हौ, तौ मैं तोहका मार देत'। तब उमर ने कहा, 'अल्लाह तबराका वा ताआला अपनी किताब में कहते हैं: '-तुम में से दो न्यायी लोगों के निर्णय के अनुसार हड्यू के रूप में - अर्थात्: ऊँट, बैल, बकरी, भेड़ - जिन्हें अल्लाह के करीब जाने के लिए काबा में लाया गया, हराम भूमि में वध किया गया और उनका मांस हज के संदर्भ में गरीबों को दिया गया - जिसके लिए काजा का पालन-पोषण किया गया-' -प्रश्न अल मैदाह: 95- अऊर उ व्यक्ति अब्दुर्रहमान बिन औफ रहा।