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ISLAM AL-HAQ: QURAN & HADITH
(The True Islam)



Imam Malik : 705

حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ مَالِك عَنْ ابْنِ شِهَابٍ عَنْ سَالِمِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَ أَنَّهُ قَالَالْمُحْصَرُ بِمَرَضٍ لَا يَحِلُّ حَتَّى يَطُوفَ بِالْبَيْتِ وَيَسْعَى بَيْنَ الصَّفَا وَالْمَرْوَةِ فَإِذَا اضْطُرَّ إِلَى لُبْسِ شَيْءٍ مِنْ الثِّيَابِ الَّتِي لَا بُدَّ لَهُ مِنْهَا أَوْ الدَّوَاءِ صَنَعَ ذَلِكَ وَافْتَدَى

मोका बतावा गा है कि याह्या मलिक से [इब्न शिहाब] से [सलीम बिन अब्दुल्ला] से [अब्दुल्ला बिन उमर] से कहिन; 'जो मनई बीमारी से ग्रसित है, तब तक ऊ तवाफ न करै अऊर साफा अऊर मरवा के बीच साई करै तब तक चैन से न रहै। अगर ओका कुछ खास कपड़ा पहिरै या अपनी बीमारी के दवाई लेय का मजबूर कीन जात है, तौ ओका अइसन करै का चाही अऊर फिर फिद्यह देय का चाही'।