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इस्लाम अल-हक़: क़ुरआन और हदीस
(सच्चा इस्लाम)



इमाम मलिक : 673

و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ دِينَارٍ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَ أَنَّهُ كَانَ يَقُولُمَنْ اعْتَمَرَ فِي أَشْهُرِ الْحَجِّ فِي شَوَّالٍ أَوْ ذِي الْقَعْدَةِ أَوْ فِي ذِي الْحِجَّةِ قَبْلَ الْحَجِّ ثُمَّ أَقَامَ بِمَكَّةَ حَتَّى يُدْرِكَهُ الْحَجُّ فَهُوَ مُتَمَتِّعٌ إِنْ حَجَّ وَعَلَيْهِ مَا اسْتَيْسَرَ مِنْ الْهَدْيِ فَإِنْ لَمْ يَجِدْ فَصِيَامُ ثَلَاثَةِ أَيَّامٍ فِي الْحَجِّ وَسَبْعَةٍ إِذَا رَجَعَ

मुझे मालिक [अब्दुल्ला बिन दीनार] से [अब्दुल्ला बिन उमर] ने बताया है कि, "जो कोई हज के महीनों में उमराह करता है, चाहे वह शव्वाल का महीना हो या ज़ुल-कादा या ज़ुल-हिज्जा हज से पहले, फिर हज का समय आने तक मक्का में रहता है, तो उसे तमत्तु करने वाला कहा जाता है।" हज और सात दिन अगर तुम हज से लौट आए हो।