Imam Malik : 659
و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ عَلْقَمَةَ بْنِ أَبِي عَلْقَمَةَ عَنْ أُمِّهِ عَنْ عَائِشَةَ أُمِّ الْمُؤْمِنِينَأَنَّهَا كَانَتْ تَنْزِلُ مِنْ عَرَفَةَ بِنَمِرَةَ ثُمَّ تَحَوَّلَتْ إِلَى الْأَرَاكِ قَالَتْ وَكَانَتْ عَائِشَةُ تُهِلُّ مَا كَانَتْ فِي مَنْزِلِهَا وَمَنْ كَانَ مَعَهَا فَإِذَا رَكِبَتْ فَتَوَجَّهَتْ إِلَى الْمَوْقِفِ تَرَكَتْ الْإِهْلَالَ قَالَتْ وَكَانَتْ عَائِشَةُ تَعْتَمِرُ بَعْدَ الْحَجِّ مِنْ مَكَّةَ فِي ذِي الْحِجَّةِ ثُمَّ تَرَكَتْ ذَلِكَ فَكَانَتْ تَخْرُجُ قَبْلَ هِلَالِ الْمُحَرَّمِ حَتَّى تَأْتِيَ الْجُحْفَةَ فَتُقِيمَ بِهَا حَتَّى تَرَى الْهِلَالَ فَإِذَا رَأَتْ الْهِلَالَ أَهَلَّتْ بِعُمْرَةٍ
['अलकामा बिन अबू 'अलकामा] से मलिक से [अपनी महतारी] से [ऐस्याह] उम्मुल मुकमिनिन से बताइस है कि उ अराफा के दिन नमिराह मा रात बिताइस, फिर अल अरक के ओर मुड़ा। अलकामा बिन अबू अलकामा के महतारी कहिन; 'ऐसियाह तब तलबिया करत रहीं जब उ वहाँ रहीं, वइसने उनके साथ लोग भी करत रहीं। जब उ आपन वाहन मा चढ़ि के वुकुफ स्थान के ओर चल देत है, तब उ तालबिया छोड़ देत है। उ जोड़े; धूल हिज्जा के महीना में मक्का से हज के बाद आयशा ने उमरा किया, फिर उमरा त्याग दिया। मोहर्रम का अर्धचंद्र दिखाई देने से पहले ऐसियाह चली गई, इसलिए वह जुहफा पहुंच गईं। तब तक वही रहे जब तक अमावस्या न देखि ॥ अगर उ अमावस्या देखे अहै, तौ उ उमरा के लिए इहराम शुरू करत है'।