Puasa 'Asyura tidak wajib, tapi sangat dianjurkan
Imam Bukhari : 3544
حَدَّثَنَا مُسَدَّدٌ حَدَّثَنَا يَحْيَى حَدَّثَنَا هِشَامٌ قَالَ حَدَّثَنِي أَبِي عَنْ عَائِشَةَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهَا قَالَتْكَانَ يَوْمُ عَاشُورَاءَ يَوْمًا تَصُومُهُ قُرَيْشٌ فِي الْجَاهِلِيَّةِ وَكَانَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَصُومُهُ فَلَمَّا قَدِمَ الْمَدِينَةَ صَامَهُ وَأَمَرَ بِصِيَامِهِ فَلَمَّا نَزَلَ رَمَضَانُ كَانَ مَنْ شَاءَ صَامَهُ وَمَنْ شَاءَ لَا يَصُومُهُ
हमसे कहिस है [मुसद्दाद] हमसे कहिस है [यह्या] हमसे कहिस है [हिशम] कहिस, हमसे कहिस है [मेरे पिता] से [ऐस्याह] रदलियाहु अन्हा कहिस; जाहिलिया युग मा आशूरा - धुल हिज्जा के दसवां दिन - उ दिन रहा जब कुरैश रोजा रखत रहें, अऊर पैगम्बर सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम भी उ दिन रोजा रखत रहें। जब उ मदीना पहुँचे, तौ उ दिन भी रोजा रखिन अऊर मुसलमानन का रोजा रखै का आदेश दिहिन - एक फर्ज के रूप मा -। हालाँकि, रमदलान के महीना के लिए रोजा रखै के आदेश मिलै के बाद, जे चाहत है, ओका आशुरा के दिन रोजा रखै का स्वागत है अऊर जे चाहे ओका अइसन न करै के भी अनुमति है।
Hadith Corroboration :
Imam Ahmad : 1953, 2839, 3820, 4956, 6010, 14929, 16264, 16286, 18838, 20003, 20100, 22884, 23065, 23097, 24874, 24912, 26117
Imam Bukhari : 1760, 1863, 1864, 3544, 4141, 4142, 4143, 4144
Imam Muslim : 1897, 1898, 1899, 1900, 1901, 1902, 1903, 1904, 1905, 1906, 1907, 1908, 1909
Imam Abu Dawud : 2052, 2087
Imam Nasa'i : 2275
Imam Ibnu Majah : 1651, 1727
Imam Malik : 587, 588
Imam Darimi : 1697, 1698