Rasulullah tidak melebihi sebelas rakaat baik di bulan ramadlon atau yang lain
Imam Malik : 243و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ سَعِيدِ بْنِ أَبِي سَعِيدٍ الْمَقْبُرِيِّ عَنْ أَبِي سَلَمَةَ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ عَوْفٍ أَنَّهُ سَأَلَ عَائِشَةَ زَوْجَ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَكَيْفَ كَانَتْ صَلَاةُ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فِي رَمَضَانَ فَقَالَتْ مَا كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَزِيدُ فِي رَمَضَانَ وَلَا فِي غَيْرِهِ عَلَى إِحْدَى عَشْرَةَ رَكْعَةً يُصَلِّي أَرْبَعًا فَلَا تَسْأَلْ عَنْ حُسْنِهِنَّ وَطُولِهِنَّ ثُمَّ يُصَلِّي أَرْبَعًا فَلَا تَسْأَلْ عَنْ حُسْنِهِنَّ وَطُولِهِنَّ ثُمَّ يُصَلِّي ثَلَاثًا فَقَالَتْ عَائِشَةُ فَقُلْتُ يَا رَسُولَ اللَّهِ أَتَنَامُ قَبْلَ أَنْ تُوتِرَ فَقَالَ يَا عَائِشَةُ إِنَّ عَيْنَيَّ تَنَامَانِ وَلَا يَنَامُ قَلْبِي
हमरा मलिक स [सैद बिन अबू सईद अल मकबुरी] स [अबू सलामाह बिन अब्दुररहमान बिन औफ] स कहल गेल अछि जे ओ [आइस्याह] नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम क पत्नी स पूछलथि, 'रमाललान मास मे अल्लाह क रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम क नमाज केहन अछि? ' तखन ऐश्याह जवाब देलनि, 'अल्लाह केर रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम एगारह रकाअत सँ बेसी नमाज नहि केने छलाह, चाहे ओ रमदलान मास मे हो वा कोनो आन मास मे।' चारि रकाअत नमाज केलनि, ई नहि पूछू जे कतेक नीक अछि आ कतेक दिन धरि अछि। चारि रकाअत नमाज केलनि, ई नहि पूछू जे कतेक नीक अछि आ कतेक दिन धरि अछि। तकर बाद तीन रकाअत नमाज पढ़लनि। ऐश्या अपन बात आगू बजलीह, 'हम तखन पुछलियनि, 'हे अल्लाह केर रसूलुल्लाह, की अहाँ वितिर सँ पहिने सुति गेलहुँ? ' ओ उत्तर देलनि : 'हे ऐस्यह, सत्ते हमर आँखि सुति रहल अछि मुदा हृदय नहि' ।