Imam Bukhari : 3515
حَدَّثَنِي مُحَمَّدُ بْنُ يَحْيَى أَبُو عَلِيٍّ حَدَّثَنَا شَاذَانُ أَخُو عَبْدَانَ حَدَّثَنَا أَبِي أَخْبَرَنَا شُعْبَةُ بْنُ الْحَجَّاجِ عَنْ هِشَامِ بْنِ زَيْدٍ قَالَ سَمِعْتُ أَنَسَ بْنَ مَالِكٍ يَقُولُمَرَّ أَبُو بَكْرٍ وَالْعَبَّاسُ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا بِمَجْلِسٍ مِنْ مَجَالِسِ الْأَنْصَارِ وَهُمْ يَبْكُونَ فَقَالَ مَا يُبْكِيكُمْ قَالُوا ذَكَرْنَا مَجْلِسَ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مِنَّا فَدَخَلَ عَلَى النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَأَخْبَرَهُ بِذَلِكَ قَالَ فَخَرَجَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَقَدْ عَصَبَ عَلَى رَأْسِهِ حَاشِيَةَ بُرْدٍ قَالَ فَصَعِدَ الْمِنْبَرَ وَلَمْ يَصْعَدْهُ بَعْدَ ذَلِكَ الْيَوْمِ فَحَمِدَ اللَّهَ وَأَثْنَى عَلَيْهِ ثُمَّ قَالَ أُوصِيكُمْ بِالْأَنْصَارِ فَإِنَّهُمْ كَرِشِي وَعَيْبَتِي وَقَدْ قَضَوْا الَّذِي عَلَيْهِمْ وَبَقِيَ الَّذِي لَهُمْ فَاقْبَلُوا مِنْ مُحْسِنِهِمْ وَتَجَاوَزُوا عَنْ مُسِيئِهِمْ
हमका बतावा है [मुहम्मद बिन याह्या अबू अली] हमसे कहिस है [स्यादजान, अब्दान के भाई] हमसे कहिस है [मेरे पिता] हमसे कहिस है [स्युबाह बिन अल हज्जाज] से [हिस्याम बिन जैद] कहिन, हम [अनस बिन मलिक] का कहत सुने रहेन; अबू बकर अऊर अलअब्बास रदलियाल्लाहु अन्हू रोवत समय अंसार के एक सभा के सामने से गुजरिन। अबू बकर ने पूछा; 'तुम रोवै के कारन का रहा?'। उइ जवाब दिहिन; 'हमका पैगम्बर शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के सभा याद है जेहिमा हम एक बार भाग लिहे रहेन'। त अल अब्बास पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से मिले अऊर ओनका ई बारे मा बताइन।' कथावाचक कहिन; तौ पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम आपन माथा कम्बल मा लपेट के बाहर आइन। कथावाचक कहिन; यहिसे उ पल्पिट पै चढ़िन अऊर उ दिन के बाद उ पल्पिट पै नाहीं चढ़िन। उ अल्लाह के तारीफ किहिन अऊर ओनका शुद्ध किहिन फिर कहिन: 'मैं तोहका हुकुम देत हई - अंसार के प्रति दयालु बनौ। उइ मोर गुप्त रक्षक अऊर मोर विश्वासपात्र हैं। उइ ओनके ऊपर जवन अनिवार्य है, ओका पूरा किहिन हैं अऊर ओनके पास अबहियों ओनके अधिकार है जवन ओनके अधिकार है। तौ ओनके बीच से अच्छे लोगन का स्वीकार करा अऊर ओनके बीच से गलत लोगन का माफ करा'।