Imam Bukhari : 3388
حَدَّثَنِي هِشَامُ بْنُ عَمَّارٍ حَدَّثَنَا صَدَقَةُ بْنُ خَالِدٍ حَدَّثَنَا زَيْدُ بْنُ وَاقِدٍ عَنْ بُسْرِ بْنِ عُبَيْدِ اللَّهِ عَنْ عَائِذِ اللَّهِ أَبِي إِدْرِيسَ عَنْ أَبِي الدَّرْدَاءِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَكُنْتُ جَالِسًا عِنْدَ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِذْ أَقْبَلَ أَبُو بَكْرٍ آخِذًا بِطَرَفِ ثَوْبِهِ حَتَّى أَبْدَى عَنْ رُكْبَتِهِ فَقَالَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَمَّا صَاحِبُكُمْ فَقَدْ غَامَرَ فَسَلَّمَ وَقَالَ إِنِّي كَانَ بَيْنِي وَبَيْنَ ابْنِ الْخَطَّابِ شَيْءٌ فَأَسْرَعْتُ إِلَيْهِ ثُمَّ نَدِمْتُ فَسَأَلْتُهُ أَنْ يَغْفِرَ لِي فَأَبَى عَلَيَّ فَأَقْبَلْتُ إِلَيْكَ فَقَالَ يَغْفِرُ اللَّهُ لَكَ يَا أَبَا بَكْرٍ ثَلَاثًا ثُمَّ إِنَّ عُمَرَ نَدِمَ فَأَتَى مَنْزِلَ أَبِي بَكْرٍ فَسَأَلَ أَثَّمَ أَبُو بَكْرٍ فَقَالُوا لَا فَأَتَى إِلَى النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَسَلَّمَ فَجَعَلَ وَجْهُ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَتَمَعَّرُ حَتَّى أَشْفَقَ أَبُو بَكْرٍ فَجَثَا عَلَى رُكْبَتَيْهِ فَقَالَ يَا رَسُولَ اللَّهِ وَاللَّهِ أَنَا كُنْتُ أَظْلَمَ مَرَّتَيْنِ فَقَالَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِنَّ اللَّهَ بَعَثَنِي إِلَيْكُمْ فَقُلْتُمْ كَذَبْتَ وَقَالَ أَبُو بَكْرٍ صَدَقَ وَوَاسَانِي بِنَفْسِهِ وَمَالِهِ فَهَلْ أَنْتُمْ تَارِكُوا لِي صَاحِبِي مَرَّتَيْنِ فَمَا أُوذِيَ بَعْدَهَا
हमका बतावा है [हिस्याम बिन 'अम्मर] हमसे कहिस है [शदाकाह बिन खालिद] हमसे [जैद बिन वाकिद] से [बुसर बिन उबैदुल्लाह] से ['ऐदज़ुल्लाह अबू इदरीस] से [अबू अद-अरदा' रदलियाहु अन्हू] से कहिस है; 'मैं पैगम्बर शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के बगल मा बैठा रहा, अचानक अबू बकर आए, अपनी कमीज के किनारे, शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम, तब तक पकड़े रहे जब तक कि उ उनके घुटनों के करीब न होइ गवा। तो पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने पूछा: 'क्या तुम्हारे दोस्त नाराज हैं?'। तो अबू बकर ने उनका नमस्कार किया और कहा; 'मुझे इब्न अल खथब से एक समस्या रही तब मैं उनसे पहले से ही नाराज रहा लेकिन फिर मुझे पछतावा हुआ, मैं माफी माँगे के लिए उनसे मिलने आया लेकिन उ मुझसे माफ करै से हिचकत रहे। यहै कारन राजा के लगे आयेंव'। तो उन्होंने कहा: 'अल्लाह तुमको माफ कर देगा, हे अबू बकर'। ई वाक्य उ तीन बार कहिन। तब उमर को पछताया और अबू बकर के आवास पर जाकर पूछा; 'का अबू बकर हैं?'। लोग जवाब दिहिन; 'कोऊ नाहीं है'। तब उमर पैगम्बर शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से मिले जिनके आगमन से पैगम्बर शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का चेहरा नाराज दिखाई दिया लेकिन अबू बकर के आगमन के कारण तनाव बंद हो गया जो तुरंत घुटने टेककर बैठ गए और बोले; 'हे अल्लाह के रसूल, हम आपके साथ दुई बार अन्याय किहिन'। तो पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'वास्तव में अल्लाह ने मुझे आपके पास भेजा लेकिन आपने कहा; 'तुम झूठे हो' जबकि अबू बकर ने कहा; 'वह एक ईमानदार आदमी रहे' अऊर उ खुद का अऊर अपनी संपत्ति का बलिदान करत हुए लड़े रहे। का तुम मोका छोड़ि के चलब मोर दोस्त?'-उ दुइ बार दोहराइस--। तौ वहि क्षण से अबू बकर का अब कउनौ नुकसान नाहीं भा।