Seekor kuda, pada ubunnya akan terus ada kebaikan hingga hari qiyamat
Imam Bukhari : 3370
حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ أَخْبَرَنَا سُفْيَانُ حَدَّثَنَا شَبِيبُ بْنُ غَرْقَدَةَ قَالَ سَمِعْتُ الْحَيَّ يُحَدِّثُونَ عَنْ عُرْوَةَأَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَعْطَاهُ دِينَارًا يَشْتَرِي لَهُ بِهِ شَاةً فَاشْتَرَى لَهُ بِهِ شَاتَيْنِ فَبَاعَ إِحْدَاهُمَا بِدِينَارٍ وَجَاءَهُ بِدِينَارٍ وَشَاةٍ فَدَعَا لَهُ بِالْبَرَكَةِ فِي بَيْعِهِ وَكَانَ لَوْ اشْتَرَى التُّرَابَ لَرَبِحَ فِيهِقَالَ سُفْيَانُ كَانَ الْحَسَنُ بْنُ عُمَارَةَ جَاءَنَا بِهَذَا الْحَدِيثِ عَنْهُ قَالَ سَمِعَهُ شَبِيبٌ مِنْ عُرْوَةَ فَأَتَيْتُهُ فَقَالَ شَبِيبٌ إِنِّي لَمْ أَسْمَعْهُ مِنْ عُرْوَةَ قَالَ سَمِعْتُ الْحَيَّ يُخْبِرُونَهُ عَنْهُ وَلَكِنْ سَمِعْتُهُ يَقُولُ سَمِعْتُ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ الْخَيْرُ مَعْقُودٌ بِنَوَاصِي الْخَيْلِ إِلَى يَوْمِ الْقِيَامَةِ قَالَ وَقَدْ رَأَيْتُ فِي دَارِهِ سَبْعِينَ فَرَسًا قَالَ سُفْيَانُ يَشْتَرِي لَهُ شَاةً كَأَنَّهَا أُضْحِيَّةٌ
हमरा सब के कहलक अछि [अली बिन अब्दुल्लाह] हमरा सब के कहलक अछि [सुफयान] हमरा सब के बता देने अछि [स्याबीब बिन घरफदाह] कहलनि, हम सुनने छी [हमर कबिला के लोक] जे [उरवाह] के कहलखिन जे नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हुनका एक दिनार देलखिन जे ओ एकटा बकरी कीनय, ओहि पैसा स ओ दू टा बकरी कीनलक, फेर ओहि में स एकटा बकरी एक दिनार में बेचलक, फेर ओ बकरी आ एक दिनार लऽ कऽ भेंट भेलनि। तेँ ओ प्रार्थना केलनि जे हुनकर खरीद-बिक्री मे आशीर्वाद भेटय।' सचमुच, धूरा के कारोबार करला पर सेहो मुनाफा जरूर हेतै'। [सुफयान] कहलनि; 'ई अल हसन बिन उमराह छलाह जे हुनका सँ -स्याबीब सँ- ई हदीस ल' क' हमरा सभ लग आयल छलाह.' ओ कहलनि -अल हसन-; ' [स्याबीब] ['उरवाह] सँ ई हदीस सुनलनि, तेँ हम -सुफयान- स्याबीब सँ भेंट केलनि आ ओ कहलनि; ''उरवाह' सँ नहि सुनलहुँ ।' स्याबिब कहलक; 'हम हुनका स हदीस के प्रचार करय वाला लोक स सुनलहुं मुदा हुनका कहैत सुनलहुं, नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के कहैत सुनलहुं: 'कियामत के दिन तक भलाई हमेशा घोड़ा के अग्रभाग में बान्हल रहैत अछि'। ओ स्याबीब कहलनि; 'सत्ते हम हुनकर घर मे सत्तरि घोड़ा देखलहुँ अछि'। सुफियन बजलाह; 'ओ -'उरवाह- ओकरा लेल एकटा बकरी कीनने छल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम प्रत्यक्षतः बलिदानक पशुक उद्देश्य सँ' |
Hadith Corroboration :
Imam Ahmad : 4387, 4585, 4856, 4953, 5508, 5522, 5648, 7101, 8511, 9253, 9772, 10919, 11682, 11842, 12290, 14264, 18400, 18547, 18548, 18550, 18551, 18552, 18553, 18555, 18556, 18557, 18559, 26293
Imam Bukhari : 2637, 2638, 2639, 2640, 2641, 2643, 2887, 3370, 3371, 3372
Imam Muslim : 3478, 3479, 3480, 3481, 3482, 3483
Imam Tirmidzi : 1560, 1617
Imam Nasa'i : 3506, 3510, 3515, 3516, 3517, 3518, 3519, 3520, 3521, 3526
Imam Ibnu Majah : 2776, 2777, 2778, 2779, 2780
Imam Malik : 887
Imam Darimi : 2319, 2320