Imam Bukhari : 3367
بَاب حَدَّثَنِي مُحَمَّدُ بْنُ الْمُثَنَّى حَدَّثَنَا مُعَاذٌ قَالَ حَدَّثَنِي أَبِي عَنْ قَتَادَةَ حَدَّثَنَا أَنَسٌ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُأَنَّ رَجُلَيْنِ مِنْ أَصْحَابِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ خَرَجَا مِنْ عِنْدِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فِي لَيْلَةٍ مُظْلِمَةٍ وَمَعَهُمَا مِثْلُ الْمِصْبَاحَيْنِ يُضِيئَانِ بَيْنَ أَيْدِيهِمَا فَلَمَّا افْتَرَقَا صَارَ مَعَ كُلِّ وَاحِدٍ مِنْهُمَا وَاحِدٌ حَتَّى أَتَى أَهْلَهُ
हमसे कहिन है [मुहम्मद बिन अल मुत्सन्ना] हमसे कहिन हैं [मुआज़] कहिन हैं, हमसे कहिन हैं [मेरे पिता] [कतादाह] से हमसे कहिन हैं [अनस रदलियाल्लाहु अनहू] कि पैगम्बर शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के साथियन मा से दुई लोग रहे जे पैगम्बर शल्लल्लाहु अलैह वसल्लम से मिले के बाद घरे लौटि आए, काला पिलाहुअल्लाह, जबकि उनके हाथन मा दीया रहे जवन उनके रास्ता का रोशन करत रहे। जब दुइनौ अलग होइ गें, तौ हर एक दोस्त के साथ रोशनी जारी रही जब तक कि उइ अपने परिवारन से मिलै नाहीं पहुँचिन।