Imam Bukhari : 3315
حَدَّثَنَا أَبُو نُعَيْمٍ حَدَّثَنَا زَكَرِيَّاءُ قَالَ حَدَّثَنِي عَامِرٌ قَالَ حَدَّثَنِي جَابِرٌ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُأَنَّ أَبَاهُ تُوُفِّيَ وَعَلَيْهِ دَيْنٌ فَأَتَيْتُ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقُلْتُ إِنَّ أَبِي تَرَكَ عَلَيْهِ دَيْنًا وَلَيْسَ عِنْدِي إِلَّا مَا يُخْرِجُ نَخْلُهُ وَلَا يَبْلُغُ مَا يُخْرِجُ سِنِينَ مَا عَلَيْهِ فَانْطَلِقْ مَعِي لِكَيْ لَا يُفْحِشَ عَلَيَّ الْغُرَمَاءُ فَمَشَى حَوْلَ بَيْدَرٍ مِنْ بَيَادِرِ التَّمْرِ فَدَعَا ثَمَّ آخَرَ ثُمَّ جَلَسَ عَلَيْهِ فَقَالَ انْزِعُوهُ فَأَوْفَاهُمْ الَّذِي لَهُمْ وَبَقِيَ مِثْلُ مَا أَعْطَاهُمْ
हमसे कहिस है [अबू नुआइम] हमसे कहिस है [जकरिया] कहिस, हमसे कहिस है [अमीर] कहिस, हमसे कहिस है [जाबिर रदलियाअल्लाहु अन्हू] कि ओकर पिता कर्ज छोड़ के मरि गा। -उ कहिन-; 'तो मैं पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से मिला और मैंने कहा; 'मेरे पिताजी कर्ज छोड़ दिहिन जबकि मोर पास खजूर के बगीचा से पैदा होय वाले चीजन के अलावा कुछौ नाहीं है, लेकिन एक मौसम मा फसल कर्ज चुकावै के लिए पर्याप्त नाहीं है।' कर्जदारन का मोर ऊपर गारी न दें खातिर वा मोर साथै भी चला गा रहै। फिर खजूर के ढेर के चारो ओर घूम के प्रार्थना किहिन, फिर एक अउर ढेर के चारो ओर घूमिन, अउर खजूर के ढेर के पास बैठि के कहिन: 'बाँटौ'। तौ जाबीर खजूर बांटिन अऊर सबका चुकावै मा कामयाब होइ गें अऊर अबहियों ओतना खजूर बचे रहें जेतना उ बांटिन रहैं।'