Rasulullah menerima hadiah dan memberikan hadiah nya kepada sahabat dan makhramah
Imam Bukhari : 2895
حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ عَبْدِ الْوَهَّابِ حَدَّثَنَا حَمَّادُ بْنُ زَيْدٍ عَنْ أَيُّوبَ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ أَبِي مُلَيْكَةَأَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أُهْدِيَتْ لَهُ أَقْبِيَةٌ مِنْ دِيبَاجٍ مُزَرَّرَةٌ بِالذَّهَبِ فَقَسَمَهَا فِي نَاسٍ مِنْ أَصْحَابِهِ وَعَزَلَ مِنْهَا وَاحِدًا لِمَخْرَمَةَ بْنِ نَوْفَلٍ فَجَاءَ وَمَعَهُ ابْنُهُ الْمِسْوَرُ بْنُ مَخْرَمَةَ فَقَامَ عَلَى الْبَاب فَقَالَ ادْعُهُ لِي فَسَمِعَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ صَوْتَهُ فَأَخَذَ قَبَاءً فَتَلَقَّاهُ بِهِ وَاسْتَقْبَلَهُ بِأَزْرَارِهِ فَقَالَ يَا أَبَا الْمِسْوَرِ خَبَأْتُ هَذَا لَكَ يَا أَبَا الْمِسْوَرِ خَبَأْتُ هَذَا لَكَ وَكَانَ فِي خُلُقِهِ شِدَّةٌوَرَوَاهُ ابْنُ عُلَيَّةَ عَنْ أَيُّوبَ وَقَالَ حَاتِمُ بْنُ وَرْدَانَ حَدَّثَنَا أَيُّوبُ عَنْ ابْنِ أَبِي مُلَيْكَةَ عَنْ الْمِسْوَرِ بْنِ مَخْرَمَةَ قَدِمَتْ عَلَى النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَقْبِيَةٌ تَابَعَهُ اللَّيْثُ عَنْ ابْنِ أَبِي مُلَيْكَةَ
हमसे कहिन है [अब्दुल्ला बिन अब्दुल वहाब] हमसे [हम्मद बिन जैद] से [अयूब] से [अब्दुल्लाह बिन अबीमुलैका] से कहिन है कि पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का सोने के बटन वाले रेशम से बने कपड़ा के कईयो टुकड़ा दिहा गा रहा अऊर फिर उ ओनका अपने साथियन से लोगन का बांटिन अऊर एक टुकड़ा बिनमह नफल्ला के लिए छोड़ दिहिन। त उ अपने बेटवा के साथे आवा, [अल मिसवार बिन मखरमह] फिर दरवाजा पर खड़ा होइके कहिस; 'उसे मेरे लिए बुलाओ' पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने उनकी आवाज सुनी फिर उन्होंने शेष कपड़े लिए, और उन्होंने कपड़ों का सुंदरता दिखाते हुए उन्हें उन्हें दिए और कहा: 'हे अबू अल मिसवार, मैंने जानबूझकर तुम्हारे लिए छोड़ दिया, हे अबू अल मिसवार, मैंने जानबूझकर तुम्हारे लिए छोड़ दिया'। अबू अल मिसवार के पास एक मजबूत आवाज है। अऊर [इब्न उलेयाह] [अय्यूब] से रिवायित किहिन। अऊर कहिन [हातिम बिन वरदान] हमका [अयूब] [इब्न अबिमुलैका] से [अल मिसवार बिन मखरामह] से बताइन रहैं; 'पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के लिए कईयो कपड़ा लावा गा रहा'। ई हदीस [इब्न अबिमुलैका] से [अल लैट्स] भी अनुसरण करत है।