Imam Nasa'i : 4795
أَخْبَرَنَا هِلَالُ بْنُ الْعَلَاءِ قَالَ حَدَّثَنِي أَبِي قَالَ حَدَّثَنَا يَزِيدُ بْنُ زُرَيْعٍ عَنْ سَعِيدٍ عَنْ قَتَادَةَ عَنْ عَطَاءٍ عَنْ صَفْوَانَ بْنِ أُمَيَّةَأَنَّ رَجُلًا سَرَقَ بُرْدَةً لَهُ فَرَفَعَهُ إِلَى النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَأَمَرَ بِقَطْعِهِ فَقَالَ يَا رَسُولَ اللَّهِ قَدْ تَجَاوَزْتُ عَنْهُ فَقَالَ أَبَا وَهْبٍ أَفَلَا كَانَ قَبْلَ أَنْ تَأْتِيَنَا بِهِ فَقَطَعَهُ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ
हमसे कहिन है [हिलाल बिन अल 'अला`] ने हमसे कहा है [मेरे पिता] ने हमसे [यजीद बिन ज़ुराई] से [सैद] से [कतदाह] से ['अथो`] से [शफवान बिन उमय्याह] से कहा है कि एक आदमी ने उनकी शाल चोरी कर ली है, फिर उ पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वलालम का रिपोर्ट किहिन फिर उ उनका हाथ काटै का आदेश दिहिन। तब शफवान कहिन; 'हे रसूलुल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हम ओका माफ कइ दिहेन'। तो रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'हे अबू वाहब, तुम हमरे पास आने से पहले ऐसा काहे नहीं कहे रहे?' तब रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने उनका हाथ काट दिया।