Imam Nasa'i : 4561
أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ مَنْصُورٍ قَالَ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ عَنْ أَبِي الزُّبَيْرِ عَنْ جَابِرٍ قَالَأَدْرَكَنِي رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَكُنْتُ عَلَى نَاضِحٍ لَنَا سَوْءٍ فَقُلْتُ لَا يَزَالُ لَنَا نَاضِحُ سَوْءٍ يَا لَهْفَاهُ فَقَالَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ تَبِيعُنِيهِ يَا جَابِرُ قُلْتُ بَلْ هُوَ لَكَ يَا رَسُولَ اللَّهِ قَالَ اللَّهُمَّ اغْفِرْ لَهُ اللَّهُمَّ ارْحَمْهُ قَدْ أَخَذْتُهُ بِكَذَا وَكَذَا وَقَدْ أَعَرْتُكَ ظَهْرَهُ إِلَى الْمَدِينَةِ فَلَمَّا قَدِمْتُ الْمَدِينَةَ هَيَّأْتُهُ فَذَهَبْتُ بِهِ إِلَيْهِ فَقَالَ يَا بِلَالُ أَعْطِهِ ثَمَنَهُ فَلَمَّا أَدْبَرْتُ دَعَانِي فَخِفْتُ أَنْ يَرُدَّهُ فَقَالَ هُوَ لَكَ
हमका [मुहम्मद बिन मंसूर] सूचित कइके, उ कहिन; हमका [सुफयान] से [अबू अज जुबैर] से [जाबिर] से कहिन है, उ कहिन; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हमसे मिले अऊर हम अपने कमजोर ऊंट पर रहेन। तब हम कहेन; अफसोस, हमरे पास हमेशा कमजोर ऊँट होत हैं। तब पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'हे जाबीर, तुम मुझसे बेचने जा रहे हो?' त हम कहित है; ऊँट तुम्हारे लिए है हे अल्लाह के रसूल! उ कहिन: 'हे अल्लाह, ओका माफ करौ। हे अल्लाह ओकरे ऊपर रहम करा, बेशक हमने ओका फलाना अऊर फलाना से खरीदा है। अऊर मदीना पहुँचै तक हम ओका ओकर पीठ उधार दिहेन'। फिर मदीना पहुँचै के बाद ऊँट तैयार कइके उनके पास लावै गयेन। तब बोला: 'हे बिलाल, ओकर धन देइ दे'। फिर जब हम चले गयेन तौ उ हमका फोन किहिन, यहिसे हम चिंतित रहेन कि उ वापस कइ देई। ऊ कहिस: 'ऊँट तोहरे खातिर है'।