Buah dari pohon kurma yang sudah dikawinkan menjadi milik penjual kecuali disyaratkan pembeli dalam akad
Imam Nasa'i : 4557
أَخْبَرَنَا إِسْحَقُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ قَالَ أَنْبَأَنَا سُفْيَانُ عَنْ الزُّهْرِيِّ عَنْ سَالِمٍ عَنْ أَبِيهِعَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ مَنْ ابْتَاعَ نَخْلًا بَعْدَ أَنْ تُؤَبَّرَ فَثَمَرَتُهَا لِلْبَائِعِ إِلَّا أَنْ يَشْتَرِطَ الْمُبْتَاعُ وَمَنْ بَاعَ عَبْدًا وَلَهُ مَالٌ فَمَالُهُ لِلْبَائِعِ إِلَّا أَنْ يَشْتَرِطَ الْمُبْتَاعُ
हमका [इशाक बिन इब्राहिम] सूचित कइके, उ कहिन; हमका [सुफयान] से [अज जुहरी] से [सलीम] से [अपने पिता] से पैगम्बर सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम से रिपोर्ट किहिन हैं: 'जो भी शादी के बाद खजूर का पेड़ खरीदत है, फल खरीदै वाले व्यक्ति का होत है जब तक कि खरीदै वाले व्यक्ति का फल ओकरे लिए होवे के जरूरत न हो, अऊर जे गुलाम खरीदत है अऊर तब ओकरे पास संपत्ति है बेचै वाले मनई का होत है जब तक कि खरीदै वाले मनई का यहिके जरूरत न होय।'