Imam Nasa'i : 4229
أَخْبَرَنِي أَحْمَدُ بْنُ خَالِدٍ الْخَلَّالُ قَالَ حَدَّثَنَا مَعْنٌ قَالَ أَنْبَأَنَا مُعَاوِيَةُ وَهُوَ ابْنُ صَالِحٍ عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ جُبَيْرِ بْنِ نُفَيْرٍ عَنْ أَبِيهِ عَنْ أَبِي ثَعْلَبَةَعَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فِي الَّذِي يُدْرِكُ صَيْدَهُ بَعْدَ ثَلَاثٍ فَلْيَأْكُلْهُ إِلَّا أَنْ يُنْتِنَ
हमका [अहमद बिन खालिद अल खलाल] सूचित करत हुए, उ कहिन; हमका [मा'न] बताइस है, उ कहिन; हमका [मुआविया, अर्थात् इब्न सालिह] से [अब्दुर्रहमान बिन जुबैर बिन नुफैर] से [अपने पिता] से [अबू त्सा'लाबा] से पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से एक व्यक्ति के बारे मा रिपोर्ट किहिन है जेका तीन दिन बाद शिकार कीन गा शिकार मिलत है, उ कहिन: 'उनका तब तक खाना चाही जब तक कि उ सड़ न जाय'।