Imam Nasa'i : 3699
أَخْبَرَنَا أَبُو عَاصِمٍ خُشَيْشُ بْنُ أَصْرَمَ قَالَ حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّزَّاقِ قَالَ أَنْبَأَنَا مَعْمَرٌ عَنْ ابْنِ عَجْلَانَ عَنْ سَعِيدٍ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ لَقَدْ هَمَمْتُ أَنْ لَا أَقْبَلَ هَدِيَّةً إِلَّا مِنْ قُرَشِيٍّ أَوْ أَنْصَارِيٍّ أَوْ ثَقَفِيٍّ أَوْ دَوْسِيٍّ
हमका [अबू अशिम खुस्यैसी बिन आश्रम] सूचित कइके उ कहिन; हमसे कहिन है [अब्दुर्राजाक] कहिन; हमका [मा'मर] से [इब्नू अजलान] से [सैद] से [अबू हुरैरा] से रिपोर्ट किहिन है कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम कहिन: 'वास्तव मा मैं कुरैश, या अंसार, या त्साकिफ, या दाउस के अलावा दान स्वीकार नाहीं करय चाहत हउँ'।