Anjuran menginfakkan harta kepada diri sendiri, keluarga, kerabat, dan orang lain sesuai urutan kebutuhan
Imam Bukhari : 2228
حَدَّثَنَا مُسَدَّدٌ حَدَّثَنَا يَزِيدُ بْنُ زُرَيْعٍ حَدَّثَنَا حُسَيْنٌ الْمُعَلِّمُ حَدَّثَنَا عَطَاءُ بْنُ أَبِي رَبَاحٍ عَنْ جَابِرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا قَالَأَعْتَقَ رَجُلٌ غُلَامًا لَهُ عَنْ دُبُرٍ فَقَالَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَنْ يَشْتَرِيهِ مِنِّي فَاشْتَرَاهُ نُعَيْمُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ فَأَخَذَ ثَمَنَهُ فَدَفَعَهُ إِلَيْهِ
हमसे कहिस है [मुसद्दाद] हमसे कहिस है [यजीद बिन ज़ुराई'] हमसे कहिस है [हुसैन अल मुअल्लिम] हमसे कहिस है [अथा बिन अबू रिबाह] से [जाबिर बिन अब्दुल्ला रदलियाअल्लाहु अन्हुमा] कहिन; एक मनई रहा जे अपने मालिक के मरय के बाद एक गुलाम का आजाद कराइस अऊर पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहिन: 'कौन मोसे खरीदै चाहत है?' तौ गुलाम का नुएम बिन अब्दुल्ला खरीदिन, फिर उ खरीद से रुपिया लिहिन अऊर फिर उ मनई का रुपिया दिहिन।'