Imam Nasa'i : 2860
أَخْبَرَنَا حَاجِبُ بْنُ سُلَيْمَانَ الْمَنْبِجِيُّ عَنْ ابْنِ أَبِي رَوَّادٍ قَالَ حَدَّثَنَا ابْنُ جُرَيْجٍ عَنْ عَطَاءٍ عَنْ أُسَامَةَ بْنِ زَيْدٍ قَالَدَخَلَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ الْكَعْبَةَ فَسَبَّحَ فِي نَوَاحِيهَا وَكَبَّرَ وَلَمْ يُصَلِّ ثُمَّ خَرَجَ فَصَلَّى خَلْفَ الْمَقَامِ رَكْعَتَيْنِ ثُمَّ قَالَ هَذِهِ الْقِبْلَةُ
[इब्न अबू राववाद] से हमका [हाजिब बिन सुलेमान अल मनबाजी] रिपोर्ट करै के बाद, उ कहिन; हमका [इब्न जुरैज] ['अथो`] से [उसामाह बिन जैद] से बताइस है, उ कहिन; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम काबा में घुसे फिर उन्होंने कोने-कोने में तसबीह किया और तकबीर कहा, लेकिन उन्होंने नमाज नहीं पढ़ी, फिर उन्होंने बाहर आकर दो रेकात के मकाम के पीछे नमाज पढ़ी और कहा: 'यह किबला है'।