Imam Nasa'i : 2696
أَخْبَرَنَا قُتَيْبَةُ قَالَ حَدَّثَنَا اللَّيْثُ عَنْ نَافِعٍأَنَّ ابْنَ عُمَرَ أَرَادَ الْحَجَّ عَامَ نَزَلَ الْحَجَّاجُ بِابْنِ الزُّبَيْرِ فَقِيلَ لَهُ إِنَّهُ كَائِنٌ بَيْنَهُمْ قِتَالٌ وَأَنَا أَخَافُ أَنْ يَصُدُّوكَ قَالَ لَقَدْ كَانَ لَكُمْ فِي رَسُولِ اللَّهِ أُسْوَةٌ حَسَنَةٌ إِذًا أَصْنَعُ كَمَا صَنَعَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِنِّي أُشْهِدُكُمْ أَنِّي قَدْ أَوْجَبْتُ عُمْرَةً ثُمَّ خَرَجَ حَتَّى إِذَا كَانَ بِظَاهِرِ الْبَيْدَاءِ قَالَ مَا شَأْنُ الْحَجِّ وَالْعُمْرَةِ إِلَّا وَاحِدٌ أُشْهِدُكُمْ أَنِّي قَدْ أَوْجَبْتُ حَجًّا مَعَ عُمْرَتِي وَأَهْدَى هَدْيًا اشْتَرَاهُ بِقُدَيْدٍ ثُمَّ انْطَلَقَ يُهِلُّ بِهِمَا جَمِيعًا حَتَّى قَدِمَ مَكَّةَ فَطَافَ بِالْبَيْتِ وَبِالصَّفَا وَالْمَرْوَةِ وَلَمْ يَزِدْ عَلَى ذَلِكَ وَلَمْ يَنْحَرْ وَلَمْ يَحْلِقْ وَلَمْ يُقَصِّرْ وَلَمْ يَحِلَّ مِنْ شَيْءٍ حَرُمَ مِنْهُ حَتَّى كَانَ يَوْمُ النَّحْرِ فَنَحَرَ وَحَلَقَ فَرَأَى أَنْ قَدْ قَضَى طَوَافَ الْحَجِّ وَالْعُمْرَةِ بِطَوَافِهِ الْأَوَّلِ وَقَالَ ابْنُ عُمَرَ كَذَلِكَ فَعَلَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ
हमका [कुतैबा] सूचित कइके, उ कहिन; हमका [अल लैट्स] [नाफी] से बताइन है कि [इब्न उमर] उ साल हज करै वाला रहा जब अल हज्जाज इब्न अज़ जुबैर के पास आवा रहा। तब ओसे कहा गा; ओनके बीच युद्ध होई, अऊर हमका डर है कि उई तोहका बाधित करिहैं। उ कहिन; सचमुच आपके लिए, रसूलुल्लाह एक अच्छा रोल मॉडल है, ओह माई... अगर मैं रसूलल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के तरह करत रहौं। दरअसल, मैं आपसे गवाही मांगत हउँ कि हम उमरा करै का अपने लिए अनिवार्य बनाये हई। फिर उ रवाना भए जब तक कि बैदा के बीच मा पहुँचै के बाद उ कहिन; ई हज अऊर उमरा के शर्त नाहीं बल्कि एक है, मैं आपसे गवाही माँगत हउँ, वास्तव मा हम अपने उमरा के साथे हज का अनिवार्य कइ दिहे हई। अऊर उ कुदैद मा खरीदे गए बलि के जानवर के साथ बलिदान किहिन - जुहफा के पास एक जगह -, फिर मक्का पहुँचै तक एक साथ दुनौ करै के लिए तालबिया कहै गइन, फिर उ काबा मा तवाफ किहिन, साथ ही साथ साफा अऊर मरवाह भी किहिन अऊर इनसे अधिक नाहीं किहिन, वध नाहीं किहिन, अऊर मुंडन नाहीं किहिन अऊर अपने बालन का कम नाहीं किहिन अऊर कुछौ स्वीकार नाहीं किहिन। बलिदान के दिन तक, यहिसे उ वध किहिन, अऊर मुंडन किहिन, फिर उ आपन पहिला तवाफ से हज अऊर उमरा तवाफ पूरा करै का फैसला किहिन। अऊर इब्न उमर कहिन; रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने यही किया।