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इस्लाम अल-हक़: क़ुरआन और हदीस
(सच्चा इस्लाम)



इमाम नसाई : 2575

أَخْبَرَنَا عَبْدَةُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ الصَّفَّارِ الْبَصْرِيُّ قَالَ حَدَّثَنَا سُوَيْدٌ وَهُوَ ابْنُ عَمْرٍو الْكَلْبِيُّ عَنْ زُهَيْرٍ قَالَ حَدَّثَنَا سُهَيْلٌ عَنْ سُمَيٍّ عَنْ أَبِي صَالِحٍ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ الْحَجَّةُ الْمَبْرُورَةُ لَيْسَ لَهَا جَزَاءٌ إِلَّا الْجَنَّةُ وَالْعُمْرَةُ إِلَى الْعُمْرَةِ كَفَّارَةٌ لِمَا بَيْنَهُمَا

उन्होंने कहा, "हमें [अब्दुल्लाह बिन अब्दुल्लाह अश शफ़्फ़ार अल बशरी] ने बताया है; उन्होंने कहा, हमें [सुवैद यानी इब्न अम्र अल कलबी] ने [ज़ुहैर] से बताया है; उन्होंने कहा, हमें [सुहैल] ने [सुमई] से [अबू शालेह] से [अबू हुरैरा] से बताया है, उन्होंने कहा; पैगंबर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा है: "एक सफल हज के लिए जन्नत के अलावा कोई इनाम नहीं है, और एक उमराह और दूसरा उमराह उनके बीच के पापों का प्रायश्चित है।"

समर्थक हदीस :

इमाम अहमद : 7050, 9562, 9569, 13958, 14055, 15146
इमाम बुखारी : 1650
इमाम मुस्लिम : 2403
इमाम तिर्मिदज़ी : 855
इमाम नसाई : 2575, 2582
इमाम इब्नु माजा : 2879
इमाम मलिक : 675
इमाम दरिमी : 1727