Shalatlah di Lembah al Aqiq yang penuh barakah
Imam Bukhari : 2169
حَدَّثَنَا إِسْحَاقُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ أَخْبَرَنَا شُعَيْبُ بْنُ إِسْحَاقَ عَنْ الْأَوْزَاعِيِّ قَالَ حَدَّثَنِي يَحْيَى عَنْ عِكْرِمَةَ عَنْ ابْنِ عَبَّاسٍ عَنْ عُمَرَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُعَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ اللَّيْلَةَ أَتَانِي آتٍ مِنْ رَبِّي وَهُوَ بِالْعَقِيقِ أَنْ صَلِّ فِي هَذَا الْوَادِي الْمُبَارَكِ وَقُلْ عُمْرَةٌ فِي حَجَّةٍ
हमसे कहिन है [इशाक बिन इब्राहिम] हमसे कहिन है [शुएब बिन इशाक] से [अल अरज] कहिन, हमसे कहिन है [यह्या] से ['इकरीमा] से [इब्न अब्बास रदलियाअल्लाहु अनहू] से [उमर] से पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'आज रात मोर रब्बा द्वारा स्वर्गदूत ने मेरे पास भेजा'। उ समय उ अल अकीक के घाटी मा रहे अऊर स्वर्गदूत कहिन; 'आशीर्वाद से भरी ई घाटी मा नमाज पढ़ौ अऊर कहौ: 'मैं ई 'हज्जी' मा उमरा करै का इरादा रखत हौं।