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ISLAM AL-HAQ: QURAN & HADITH
(The True Islam)



Imam Bukhari : 2134

حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ بُكَيْرٍ حَدَّثَنَا اللَّيْثُ عَنْ عُقَيْلٍ قَالَ ابْنُ شِهَابٍ فَأَخْبَرَنِي عُرْوَةُ بْنُ الزُّبَيْرِ أَنَّ عَائِشَةَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهَا زَوْجَ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَتْ لَمْ أَعْقِلْ أَبَوَيَّ قَطُّ إِلَّا وَهُمَا يَدِينَانِ الدِّينَ وَقَالَ أَبُو صَالِحٍ حَدَّثَنِي عَبْدُ اللَّهِ عَنْ يُونُسَ عَنْ الزُّهْرِيِّ قَالَ أَخْبَرَنِي عُرْوَةُ بْنُ الزُّبَيْرِ أَنَّ عَائِشَةَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهَا قَالَتْلَمْ أَعْقِلْ أَبَوَيَّ قَطُّ إِلَّا وَهُمَا يَدِينَانِ الدِّينَ وَلَمْ يَمُرَّ عَلَيْنَا يَوْمٌ إِلَّا يَأْتِينَا فِيهِ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ طَرَفَيْ النَّهَارِ بُكْرَةً وَعَشِيَّةً فَلَمَّا ابْتُلِيَ الْمُسْلِمُونَ خَرَجَ أَبُو بَكْرٍ مُهَاجِرًا قِبَلَ الْحَبَشَةِ حَتَّى إِذَا بَلَغَ بَرْكَ الْغِمَادِ لَقِيَهُ ابْنُ الدَّغِنَةِ وَهُوَ سَيِّدُ الْقَارَةِ فَقَالَ أَيْنَ تُرِيدُ يَا أَبَا بَكْرٍ فَقَالَ أَبُو بَكْرٍ أَخْرَجَنِي قَوْمِي فَأَنَا أُرِيدُ أَنْ أَسِيحَ فِي الْأَرْضِ فَأَعْبُدَ رَبِّي قَالَ ابْنُ الدَّغِنَةِ إِنَّ مِثْلَكَ لَا يَخْرُجُ وَلَا يُخْرَجُ فَإِنَّكَ تَكْسِبُ الْمَعْدُومَ وَتَصِلُ الرَّحِمَ وَتَحْمِلُ الْكَلَّ وَتَقْرِي الضَّيْفَ وَتُعِينُ عَلَى نَوَائِبِ الْحَقِّ وَأَنَا لَكَ جَارٌ فَارْجِعْ فَاعْبُدْ رَبَّكَ بِبِلَادِكَ فَارْتَحَلَ ابْنُ الدَّغِنَةِ فَرَجَعَ مَعَ أَبِي بَكْرٍ فَطَافَ فِي أَشْرَافِ كُفَّارِ قُرَيْشٍ فَقَالَ لَهُمْ إِنَّ أَبَا بَكْرٍ لَا يَخْرُجُ مِثْلُهُ وَلَا يُخْرَجُ أَتُخْرِجُونَ رَجُلًا يُكْسِبُ الْمَعْدُومَ وَيَصِلُ الرَّحِمَ وَيَحْمِلُ الْكَلَّ وَيَقْرِي الضَّيْفَ وَيُعِينُ عَلَى نَوَائِبِ الْحَقِّ فَأَنْفَذَتْ قُرَيْشٌ جِوَارَ ابْنِ الدَّغِنَةِ وَآمَنُوا أَبَا بَكْرٍ وَقَالُوا لِابْنِ الدَّغِنَةِ مُرْ أَبَا بَكْرٍ فَلْيَعْبُدْ رَبَّهُ فِي دَارِهِ فَلْيُصَلِّ وَلْيَقْرَأْ مَا شَاءَ وَلَا يُؤْذِينَا بِذَلِكَ وَلَا يَسْتَعْلِنْ بِهِ فَإِنَّا قَدْ خَشِينَا أَنْ يَفْتِنَ أَبْنَاءَنَا وَنِسَاءَنَا قَالَ ذَلِكَ ابْنُ الدَّغِنَةِ لِأَبِي بَكْرٍ فَطَفِقَ أَبُو بَكْرٍ يَعْبُدُ رَبَّهُ فِي دَارِهِ وَلَا يَسْتَعْلِنُ بِالصَّلَاةِ وَلَا الْقِرَاءَةِ فِي غَيْرِ دَارِهِ ثُمَّ بَدَا لِأَبِي بَكْرٍ فَابْتَنَى مَسْجِدًا بِفِنَاءِ دَارِهِ وَبَرَزَ فَكَانَ يُصَلِّي فِيهِ وَيَقْرَأُ الْقُرْآنَ فَيَتَقَصَّفُ عَلَيْهِ نِسَاءُ الْمُشْرِكِينَ وَأَبْنَاؤُهُمْ يَعْجَبُونَ وَيَنْظُرُونَ إِلَيْهِ وَكَانَ أَبُو بَكْرٍ رَجُلًا بَكَّاءً لَا يَمْلِكُ دَمْعَهُ حِينَ يَقْرَأُ الْقُرْآنَ فَأَفْزَعَ ذَلِكَ أَشْرَافَ قُرَيْشٍ مِنْ الْمُشْرِكِينَ فَأَرْسَلُوا إِلَى ابْنِ الدَّغِنَةِ فَقَدِمَ عَلَيْهِمْ فَقَالُوا لَهُ إِنَّا كُنَّا أَجَرْنَا أَبَا بَكْرٍ عَلَى أَنْ يَعْبُدَ رَبَّهُ فِي دَارِهِ وَإِنَّهُ جَاوَزَ ذَلِكَ فَابْتَنَى مَسْجِدًا بِفِنَاءِ دَارِهِ وَأَعْلَنَ الصَّلَاةَ وَالْقِرَاءَةَ وَقَدْ خَشِينَا أَنْ يَفْتِنَ أَبْنَاءَنَا وَنِسَاءَنَا فَأْتِهِ فَإِنْ أَحَبَّ أَنْ يَقْتَصِرَ عَلَى أَنْ يَعْبُدَ رَبَّهُ فِي دَارِهِ فَعَلَ وَإِنْ أَبَى إِلَّا أَنْ يُعْلِنَ ذَلِكَ فَسَلْهُ أَنْ يَرُدَّ إِلَيْكَ ذِمَّتَكَ فَإِنَّا كَرِهْنَا أَنْ نُخْفِرَكَ وَلَسْنَا مُقِرِّينَ لِأَبِي بَكْرٍ الِاسْتِعْلَانَ قَالَتْ عَائِشَةُ فَأَتَى ابْنُ الدَّغِنَةِ أَبَا بَكْرٍ فَقَالَ قَدْ عَلِمْتَ الَّذِي عَقَدْتُ لَكَ عَلَيْهِ فَإِمَّا أَنْ تَقْتَصِرَ عَلَى ذَلِكَ وَإِمَّا أَنْ تَرُدَّ إِلَيَّ ذِمَّتِي فَإِنِّي لَا أُحِبُّ أَنْ تَسْمَعَ الْعَرَبُ أَنِّي أُخْفِرْتُ فِي رَجُلٍ عَقَدْتُ لَهُ قَالَ أَبُو بَكْرٍ إِنِّي أَرُدُّ إِلَيْكَ جِوَارَكَ وَأَرْضَى بِجِوَارِ اللَّهِ وَرَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَوْمَئِذٍ بِمَكَّةَ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَدْ أُرِيتُ دَارَ هِجْرَتِكُمْ رَأَيْتُ سَبْخَةً ذَاتَ نَخْلٍ بَيْنَ لَابَتَيْنِ وَهُمَا الْحَرَّتَانِ فَهَاجَرَ مَنْ هَاجَرَ قِبَلَ الْمَدِينَةِ حِينَ ذَكَرَ ذَلِكَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَرَجَعَ إِلَى الْمَدِينَةِ بَعْضُ مَنْ كَانَ هَاجَرَ إِلَى أَرْضِ الْحَبَشَةِ وَتَجَهَّزَ أَبُو بَكْرٍ مُهَاجِرًا فَقَالَ لَهُ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ عَلَى رِسْلِكَ فَإِنِّي أَرْجُو أَنْ يُؤْذَنَ لِي قَالَ أَبُو بَكْرٍ هَلْ تَرْجُو ذَلِكَ بِأَبِي أَنْتَ قَالَ نَعَمْ فَحَبَسَ أَبُو بَكْرٍ نَفْسَهُ عَلَى رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لِيَصْحَبَهُ وَعَلَفَ رَاحِلَتَيْنِ كَانَتَا عِنْدَهُ وَرَقَ السَّمُرِ أَرْبَعَةَ أَشْهُرٍ

हमसे कहिन है [यह्या बिन बुकैर] हमसे कहिन है [अल लैट्स] से ['उकैल] कहिन, [इब्न शिहाब] फिर उ हमका [उर्वाह बिन अज़ जुबैर] बताइन कि [ऐस्या रदलियाह अन्हा] पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के पत्नी कहिन; 'जब मोर पिताजी इस्लाम धर्म अपनाइन तौ मैं यौवन तक नाहीं पहुँचा रहा'। अऊर कहिन, [अबू सालिह] ने मोहि [अब्दुल्लाह] से [यूनुस] से [अज जुहरी] कहिन, मोहि [उर्वाह बिन अज़ जुबैर] बतावा है कि [ऐस्या रदलियाह अन्हा] ने कहा; 'मैं अबहीं यौवन मा नाहीं पहुँचा रहा कि मोर पिताजी इस्लाम अपनाइन अऊर एक दिन भी नाहीं बीता लेकिन अल्लाह के रसूल हमसे मिले दिन भर, सुबह अऊर शाम दुइनौ समय आवत रहें। जब मुसलमानन का परीक्षण कीन गा रहा, तौ अबू बकर चले गें अऊर हबासिया -इथियोपिया- मा प्रवास किहिन जब तक कि जब उ बरकल घोमाद पहुँचे तौ इब्नू अद-दघिनाह, एक आदिवासी प्रमुख, ओनसे संपर्क किहिन, जे कहिन; 'अबू बकर तुम कहाँ जा रहे हो?' तौ अबू बकर जवाब दिहिन: 'मेरे लोग मोका निष्कासित कइ दिहिन हैं तौ मैं दुनिया भर मा घूमै चाहत हौं ताकि मैं अपने भगवान के पूजा कर सकौं'। इब्न अद-दघीना ने कहा: 'तुम जइसन लोगन का न छोड़ै का चाही अऊर न ही ओनका निष्कासित करै का चाही काहे से कि तुम ओन लोगन मा से एक हौ जे उनके पास कुछौ नाहीं है, दोस्ती बनावत हैं, कमजोरन का सहारा देत हैं, मेहमानन का मनोरंजन करत हैं अऊर सत्य के राह पर हमेशा मदद करत हैं। एह बरे मइँ तोहार रक्षक होब, एह बरे वापस जा अउर आपन जनम देस मँ आपन परमेस्सर के पूजा करा। तौ इब्न अद-दघीना तैयार होइके अबू बकर के साथे लौटि के कुरैश काफिरन के सामने चल दिहिन, अऊर ओनसे कहिन: 'वास्तव मा अबू बकर जइसन मनई छोड़ै के लायक नाहीं है अऊर न ही निष्कासित करै के लायक है। का तुम ओन लोगन का निष्कासित करत हौ जेनके पास कुछौ नाहीं है, ओनके लिए काम करै का पसंद करत हौ, दोस्ती करत हौ, कमजोरन के देखभाल करत हौ, मेहमानन का मनोरंजन करत हौ अऊर हमेशा सत्य के राह पर मदद करत हौ?' अंत मा, कुरैश इब्न अद-दघिना के रक्षा स्वीकार किहिन अऊर उइ अबू बकर का सुरक्षा प्रदान किहिन अऊर फिर इब्न अद-दघिना से कहिन: 'अबू बकर का आदेश दइ कि उ अपने भगवान का केवल अपने घर मा ही पूजा करै अऊर नमाज करै अऊर कुरान का पढ़ै जइसे उ चाहै अऊर उ हमका आपन गतिविधियन से परेशान न करै अऊर ओनका चिंतित न करै काहे से कि ई हमरे बच्चा के खिलाफ निंदा करै का परी अऊर पत्नियन के। त इब्न अद-दघिनाह ने ई बात अबू बकर तक पहुँचाई। यहिसे अबू बकर अपने घर मा पूजा करै लागें अऊर अपने घर के बाहर कुरान पढ़त हुए जोर से नमाज नाहीं पढ़िन। फिर अबू बकर ने अपने आँगन मा थोड़ा चौड़ा होइके एक प्रार्थना स्थल बनावा जहाँ उ वहिके प्रार्थना किहिन अऊर कुरान पढ़िन। फिर मुशरिकिन के पत्नी अऊर बच्चा वहाँ विस्मय से इकट्ठा होइ गें अऊर अबू बकर के नमाज खतम करै का इंतजार करै लागें। अऊर जइसे कि ज्ञात है, अबू बकर एक अइसन मनई रहें जे रोवै का पसंद करत रहें अऊर कुरान पढ़त समय आपन आंसू रोक नाहीं पावत रहें। तौ फिर मुशरिकन के बीच से कुरैश अधिकारी चौंक गए अऊर अंत मा उइ इब्न अद-दघिना का अपने सामने बुलावा अऊर ओनसे कहिन: 'वास्तव मा, हम अबू बकर का रक्षा दिहे अहै ताकि उ अपने घर मा नमाज पढ़ै, लेकिन उ अपने आँगन मा नमाज के जगह बनाके अऊर नमाज पढ़ै अऊर जोर से पढ़ै से ई बात का उल्लंघन किहिन, भले ही हम चिंतित रहेन कि ई हमार पत्नी अऊर बच्चन का प्रभावित करि। वास्तव मा भवा रहा। अगर उ घर मा पूजा जारी रखै का पसंद करत है, तौ आगे बढ़ौ, लेकिन अगर उ मना करत है अऊर आपन पूजा करत रहत है, तौ ओसे आपन रक्षा लौटावै का कहौ काहे से कि जब आप समझौता तोड़त हैं तौ हमका अच्छा नाहीं लागत है अऊर हम अबू बकर से सहमत होय का नाहीं मानत हैं। कहिन, ऐसियाह रदलियाहु अन्हा: त इब्न अद-दघिनाह अबू बकर से मिले अऊर कहिन: 'तुम पहिले से जानत हौ कि तुमने जवन समझौता करा है, तौ का तुम ओका रखत हौ या मोर सुरक्षा मोका लौटावत हौ काहे से कि जब अरब सुनत हैं कि हम समझौता का उल्लंघन किहेन है तौ हमका ई पसंद नाहीं है केहू के कारण हम ओसे वादा किहे रहेन'। तौ अबू बकर कहिन: 'मैं तोहका तोहार गारंटी लौटावत हउँ अऊर मैं केवल अल्लाह अऊर ओकरे रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के रक्षा से खुश हउँ। ई घटना मक्का मा भै रही। त रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहिन: 'वास्तव मा मोका उ भूमि देखावा गा है जहाँ तुम प्रवास किहे रहेव अऊर हम दुइ मजबूत पहाड़ियन के बीच खजूर के पेड़न से ढकी एक उपजाऊ भूमि देखेन। तौ मदीना मा प्रवास करै वाले लोग तब फरार होइगें जब पैगम्बर सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम ने यहि बात का जिक्र किहिन। अऊर फिर से कुछ लोग जे हबसियाह मा प्रवास किहिन रहैं, उहौ मदीना आइन जबकि अबू बकर भी प्रवास करै के तैयारी मा रहे। त रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने उनसे कहा: 'जल्दी न करौ काहे से कि हमका उम्मीद है कि हमका प्रवास करै के अनुमति मिली'। अबू बकर कहिन: 'वास्तव मा, मोर पिता के खातिर, का ई सच है कि तुम अइसन उम्मीद करत हौ?' उ कहिन: 'हाँ, ई सही है'। यहिसे अबू बकर अपने भीतर आशा करत रहें कि उ वाकई पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के साथ उनके प्रवास मा होइ सकत हैं। यहिसे उ अपने पास मौजूद दुइनौ सवार जानवरन का चार महीना तक समूर के पत्तन से खिलाइस।