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ISLAM AL-HAQ: QURAN & HADITH
(The True Islam)



Harta yang ditinggalkan adalah untuk keluarganya, dan hutang orang yang meninggal menjadi tanggungan Nabi Shallallahu 'alaihi wasalam

Imam Bukhari : 2133

حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ بُكَيْرٍ حَدَّثَنَا اللَّيْثُ عَنْ عُقَيْلٍ عَنْ ابْنِ شِهَابٍ عَنْ أَبِي سَلَمَةَ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ كَانَ يُؤْتَى بِالرَّجُلِ الْمُتَوَفَّى عَلَيْهِ الدَّيْنُ فَيَسْأَلُ هَلْ تَرَكَ لِدَيْنِهِ فَضْلًا فَإِنْ حُدِّثَ أَنَّهُ تَرَكَ لِدَيْنِهِ وَفَاءً صَلَّى وَإِلَّا قَالَ لِلْمُسْلِمِينَ صَلُّوا عَلَى صَاحِبِكُمْ فَلَمَّا فَتَحَ اللَّهُ عَلَيْهِ الْفُتُوحَ قَالَ أَنَا أَوْلَى بِالْمُؤْمِنِينَ مِنْ أَنْفُسِهِمْ فَمَنْ تُوُفِّيَ مِنْ الْمُؤْمِنِينَ فَتَرَكَ دَيْنًا فَعَلَيَّ قَضَاؤُهُ وَمَنْ تَرَكَ مَالًا فَلِوَرَثَتِهِ

हमका बतावा गा है कि [यह्या बिन बुकैर] हमसे [अल लैट्स] से ['उकैल] से [इब्न शिहाब] से [अबू सलामा] से [अबू हुरैरा रदलीअल्लाहु अन्हू] से कहिन है कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने एक बार उनके सामने एक मृत व्यक्ति - एक लाश - जे एक मृतक छोड़ दिहिस, तो उ पूछिन: ओकर कर्ज चुकावै के लिए कौनो धन?' अगर ई बतावा गा रहा कि शरीर कर्ज चुकावै के लिए कुछ छोड़ दिहिस है तौ उ ओके लिए प्रार्थना किहिन, अगर नाहीं तौ उ मुसलमानन से कहिन: 'अपने भाइयन के लिए प्रार्थना करा'। जब अल्लाह ने विभिन्न देशन मा अपने ऊपर जीत का उद्घाटन किहिन, तौ उ कहिन: 'मैं मुमिनन का अपने से ज्यादा गारंटी देत ​​हउँ, यहिसे जे मुमिनन मा से मरत है अऊर कर्ज छोड़त है, मैं ओका चुकावै का बाध्य हौं अऊर जे धन छोड़त है, तौ संपत्ति ओकरे वारिस के पास जाई'।

Hadith Corroboration :

Imam Ahmad : 7523, 7558, 7888, 9438, 9471, 9497, 9604, 10396, 12774, 13642, 13643, 14103, 16547, 16568, 16571
Imam Bukhari : 2133, 2223, 6234, 6248, 6266
Imam Muslim : 3040, 3041, 3042, 3043
Imam Abu Dawud : 2512, 2513, 2565, 2566, 2567, 2902
Imam Ibnu Majah : 2406, 2407, 2728
Imam Darimi : 2481