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ISLAM AL-HAQ: QURAN & HADITH
(The True Islam)



Imam Bukhari : 2128

حَدَّثَنَا الصَّلْتُ بْنُ مُحَمَّدٍ حَدَّثَنَا أَبُو أُسَامَةَ عَنْ إِدْرِيسَ عَنْ طَلْحَةَ بْنِ مُصَرِّفٍ عَنْ سَعِيدِ بْنِ جُبَيْرٍ عَنْ ابْنِ عَبَّاسٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا{ وَلِكُلٍّ جَعَلْنَا مَوَالِيَ }قَالَ وَرَثَةً{ وَالَّذِينَ عَاقَدَتْ أَيْمَانُكُمْ }قَالَ كَانَ الْمُهَاجِرُونَ لَمَّا قَدِمُوا الْمَدِينَةَ يَرِثُ الْمُهَاجِرُ الْأَنْصَارِيَّ دُونَ ذَوِي رَحِمِهِ لِلْأُخُوَّةِ الَّتِي آخَى النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بَيْنَهُمْ فَلَمَّا نَزَلَتْ{ وَلِكُلٍّ جَعَلْنَا مَوَالِيَ }نَسَخَتْ ثُمَّ قَالَ{ وَالَّذِينَ عَاقَدَتْ أَيْمَانُكُمْ }إِلَّا النَّصْرَ وَالرِّفَادَةَ وَالنَّصِيحَةَ وَقَدْ ذَهَبَ الْمِيرَاثُ وَيُوصِي لَهُ

हमसे [अश-शाल्तु बिन मुहम्मद] हमसे [अबू उसामा] से [इदरीस] से [थोल्हा बिन मुशर्रीफ] से [सैद बिन जुबैर] से [इब्न अब्बास रदलियाअल्लाहु अन्हुमा] से कहिन है: अल्लाह का वचन जवन कहत है -अऊर विरासत के लिए हम वारिस बनावत हैं-, उ कहिन; अर्थ: उ विरासत है। अऊर आयत -अऊर जिनसे तुम ओनके प्रति निष्ठा लिहे हौ- कहत है: जब मुहाजिरीन मदीना पहुँचे, तौ एक मुहाजिर अंसार लोगन का विरासत मा लिहिन जेकरे पास कौनो रिश्ता नाहीं रहा काहे से कि पैगम्बर सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम ने ओनके बीच भाईचारा स्थापित किहिन रहा। जब ई श्लोक उतरा तौ ई श्लोक ई प्रावधान का खतम कइ दिहिस। अऊर छंद अब आपसी सहायता के अलावा - मुहाजिरीन - अंसार - के बीच, देय अऊर सलाह के अलावा नाहीं चलत है, जबकि विरासत हटा दीन गै है अऊर वसीयत दीन गै है।