Waktu menyembelih
Imam Nasa'i : 1563
أَخْبَرَنَا قُتَيْبَةُ قَالَ حَدَّثَنَا أَبُو الْأَحْوَصِ عَنْ مَنْصُورٍ عَنْ الشَّعْبِيِّ عَنْ الْبَرَاءِ قَالَخَطَبَنَا رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَوْمَ النَّحْرِ بَعْدَ الصَّلَاةِ ثُمَّ قَالَ مَنْ صَلَّى صَلَاتَنَا وَنَسَكَ نُسُكَنَا فَقَدْ أَصَابَ النُّسُكَ وَمَنْ نَسَكَ قَبْلَ الصَّلَاةِ فَتِلْكَ شَاةُ لَحْمٍ فَقَالَ أَبُو بُرْدَةَ بْنُ نِيَارٍ يَا رَسُولَ اللَّهِ وَاللَّهِ لَقَدْ نَسَكْتُ قَبْلَ أَنْ أَخْرُجَ إِلَى الصَّلَاةِ عَرَفْتُ أَنَّ الْيَوْمَ يَوْمُ أَكْلٍ وَشُرْبٍ فَتَعَجَّلْتُ فَأَكَلْتُ وَأَطْعَمْتُ أَهْلِي وَجِيرَانِي فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ تِلْكَ شَاةُ لَحْمٍ قَالَ فَإِنَّ عِنْدِي جَذَعَةً خَيْرٌ مِنْ شَاتَيْ لَحْمٍ فَهَلْ تُجْزِي عَنِّي قَالَ نَعَمْ وَلَنْ تُجْزِيَ عَنْ أَحَدٍ بَعْدَكَ
हमका [कुतैबा] से रिपोर्ट कइके उ कहिन; हमका [अबुल अहवाह] से [मंसूर] से [अश श'बी] से [अल बर्रा'] से कहिन है; 'अल्लाह के रसूल सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम ने नमाज के बाद बलिदान के पर्व पर एक उपदेश दिया, फिर कहा: 'जो कोई भी -हमरी नमाज के तरह- नमाज करत है, अऊर बलिदान -जैसे- हमरे बलिदान करत है, तो उ सही ढंग से बलिदान किहिस है, अऊर जे नमाज से पहिले बलिदान करत है, तौ उ केवल बकरी -बलिदान नाहीं है'। अबू बुरदह बिन नियार ने कहा, 'हे अल्लाह के रसूल, अल्लाह के कसम, मैंने ईद के नमाज के लिए बाहर जाने से पहले बलिदान को मार दिया, काहे से कि मैं जानत रहेंव कि आज खाने-पीने का दिन है, तो मैंने बलिदान का वध करै में जल्दबाजी की, फिर मैंने ओका खाया अऊर अपने परिवार अऊर पड़ोसियन का दइ दिहिन,' तब रसूल अल्लाह ने कहा: मांस बकरी नाहीं है। बलिदान।' अबू बुरदह कहिन; 'वास्तव मा, मोर पास एक भाग्य है जवन दुई मांस बकरी से अच्छा है, तौ का ई मोर लिए काफी है -बल्कि-? पैगम्बर जवाब दिहिन: 'हाँ,' लेकिन ई आपके बाद केहू के लिए काफी नाहीं है'।
Hadith Corroboration :
Imam Ahmad : 11677, 11727, 15270, 18045, 18049, 18052, 18058, 18061
Imam Bukhari : 901, 902, 930, 931, 932, 5076, 5120, 5123, 5130, 5131, 5135, 5136, 6181, 6851
Imam Muslim : 3621, 3622, 3623, 3624, 3625, 3626, 3627, 3628, 3629, 3630, 3632
Imam Abu Dawud : 2418, 2419
Imam Nasa'i : 1563, 4292, 4320, 4321, 4322
Imam Ibnu Majah : 3142, 3143
Imam Darimi : 1880, 1881