Mu'adz pernah dengan memulai membaca surat Al baqarah dalam shalat maghrib
Imam Nasa'i : 974
أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ قَالَ حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّحْمَنِ قَالَ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ عَنْ مُحَارِبِ بْنِ دِثَارٍ عَنْ جَابِرٍ قَالَمَرَّ رَجُلٌ مِنْ الْأَنْصَارِ بِنَاضِحَيْنِ عَلَى مُعَاذٍ وَهُوَ يُصَلِّي الْمَغْرِبَ فَافْتَتَحَ بِسُورَةِ الْبَقَرَةِ فَصَلَّى الرَّجُلُ ثُمَّ ذَهَبَ فَبَلَغَ ذَلِكَ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقَالَ أَفَتَّانٌ يَا مُعَاذُ أَفَتَّانٌ يَا مُعَاذُ أَلَّا قَرَأْتَ بِسَبِّحِ اسْمَ رَبِّكَ الْأَعْلَى وَالشَّمْسِ وَضُحَاهَا وَنَحْوِهِمَا
हमका [मुहम्मद बिन बसियार] सूचित किहिन हैं, उ कहिन; हमसे [अब्दुर्रहमान] कहिन है, उ कहिन; हमका [सुफयान] से [मुहरीब बिन दित्सर] से [जाबिर] से कहिन है; 'मुआज़ के पास से एक अंसार आदमी गुजरत रहा, जे दुइ ऊँट के पीये के कटोरा लइके जात रहा, भले ही मुअदज़ मगरिब के नमाज पढ़त रहा। उ सूरह अल बकरा पढ़ के मगरिब नमाज शुरू किहिन। ऊ आदमी नमाज पढ़िस फिर चला गवा, अऊर ई रसूलल्लाह शल्लल्लाह अलैहि वसल्लम तक पहुँचा, तौ उ शल्लल्लाह अलैहि वसल्लम तब कहिस; 'ओ मुआदज़, का तुम बदनामी करै वाला बनय चाहत हौ? हे मुआद्ज, का तुम बदनामी करै वाला बनय चाहत हौ? आप सबबिहिस्मा रब्बिकल आ'ला -प्रश्न काहे नाहीं पढ़ै चाहत हई। अल अ'ला- अऊर वासीसमसी वाडलुहाहा -प्रश्न। असी-स्यामसी-, या कुछ अइसने? '