Nabi ingin memanjangkan shalat, namun mendengar tangisan bayi, maka beliau memendekkan shalat karena khawatir akan memberatkan ibunya
Imam Nasa'i : 816
أَخْبَرَنَا سُوَيْدُ بْنُ نَصْرٍ قَالَ حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ عَنْ الْأَوْزَاعِيِّ قَالَ حَدَّثَنِي يَحْيَى بْنُ أَبِي كَثِيرٍ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ أَبِي قَتَادَةَ عَنْ أَبِيهِعَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ إِنِّي لَأَقُومُ فِي الصَّلَاةِ فَأَسْمَعُ بُكَاءَ الصَّبِيِّ فَأُوجِزُ فِي صَلَاتِي كَرَاهِيَةَ أَنْ أَشُقَّ عَلَى أُمِّهِ
हमका [सुवैद बिन नसर] सूचित कइके उ कहिन; हमका [अब्दुल्ला] से [अल औजाई] बताइस है, उ कहिन; ने मुझसे [यह्या बिन अबू कथिर] से [अब्दुल्लाह बिन अबू कतादाह] से [अपने पिता] से पैगम्बर सल्लल्लाहुअलिहिवासल्लम से कहा है, उ सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: 'मैं नमाज पढ़त समय खड़ा रहा, तब मैंने एक बच्चा का रोना सुना, तो मैंने अपनी नमाज छोटी कर दी। काहे से कि हमका ओकर महतारी पर बोझ डालब - परेशान करब - पसंद नाहीं है'।