Badui menyebut Maghrib dengan 'Isya
Imam Nasa'i : 538
أَخْبَرَنَا أَحْمَدُ بْنُ سُلَيْمَانَ قَالَ حَدَّثَنَا أَبُو دَاوُدَ هُوَ الْحَفَرِيُّ عَنْ سُفْيَانَ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ أَبِي لَبِيدٍ عَنْ أَبِي سَلَمَةَ عَنْ ابْنِ عُمَرَ قَالَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لَا تَغْلِبَنَّكُمْ الْأَعْرَابُ عَلَى اسْمِ صَلَاتِكُمْ هَذِهِ فَإِنَّهُمْ يُعْتِمُونَ عَلَى الْإِبِلِ وَإِنَّهَا الْعِشَاءُ
हमका [अहमद बिन सुलेमान] सूचित कइके उ कहिन; हमसे कहिन है [अबू दाउद -अर्थात अल हफारी] से [सुफियान] से [अब्दुल्लाह बिन अबू लबीद] से [अबू सलामा] से [इब्न उमर] उ कहिन; कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा; 'अपनी प्रार्थना के शर्त देय मा बेडौइन से न मारा जाय। ईशा नमाज का 'अतम' कहत हैं, ई कहत हैं काहे से कि उ आधी रात मा ऊँट का कलम लगावत हैं अऊर ओका दूध पिलावत हैं, भले ही ईशा है'।