Imam Nasa'i : 522
أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ قَالَ حَدَّثَنَا يَحْيَى قَالَ حَدَّثَنَا عَوْفٌ قَالَ حَدَّثَنِي سَيَّارُ بْنُ سَلَامَةَ قَالَدَخَلْتُ عَلَى أَبِي بَرْزَةَ فَسَأَلَهُ أَبِي كَيْفَ كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يُصَلِّي الْمَكْتُوبَةَ قَالَ كَانَ يُصَلِّي الْهَجِيرَ الَّتِي تَدْعُونَهَا الْأُولَى حِينَ تَدْحَضُ الشَّمْسُ وَكَانَ يُصَلِّي الْعَصْرَ حِينَ يَرْجِعُ أَحَدُنَا إِلَى رَحْلِهِ فِي أَقْصَى الْمَدِينَةِ وَالشَّمْسُ حَيَّةٌ وَنَسِيتُ مَا قَالَ فِي الْمَغْرِبِ وَكَانَ يَسْتَحِبُّ أَنْ يُؤَخِّرَ الْعِشَاءَ الَّتِي تَدْعُونَهَا الْعَتَمَةَ وَكَانَ يَكْرَهُ النَّوْمَ قَبْلَهَا وَالْحَدِيثَ بَعْدَهَا وَكَانَ يَنْفَتِلُ مِنْ صَلَاةِ الْغَدَاةِ حِينَ يَعْرِفُ الرَّجُلُ جَلِيسَهُ وَكَانَ يَقْرَأُ بِالسِّتِّينَ إِلَى الْمِائَةِ
हमका [मुहम्मद बिन बसियार] सूचित किहिन हैं, उ कहिन; हमसे [यह्या] कहिन है, उ कहिन; हमसे कहिस है ['औफ] उ कहिन; हमसे कहिन है [सैयार बिन सलामा] कहिन; 'मैं [अबू बरजाह] के पास आवा अऊर ओसे पूछा। रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फर्ज नमाज कैसे पढ़ी? उ -सय्यार- जवाब दिहिन, 'अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम तब नमाज पढ़िन जब मौसम बहुत गर्म रहा - आप एकरा पहिला नमाज कहत हई - जब सूरज पश्चिम के ओर झुका रहा, अऊर उ असर नमाज पढ़िन जब हममें से एक मदीना के अंत मा उनके घर लौटिन अऊर सूरज अबहियों चमकत रहा। मगरिब के नमाज मा का कहा गा रहा, हम भूल गयेन। ऊ ईशा नमाज का स्थगित करब पसंद करत है - जेका आप आमतौर पर 'अतम नमाज कहत हैं -। ईशा से पहिले सोवै अऊर बाद मा बातचीत करै का उनका पसंद नाहीं रहा। जब केहू बगल मा बैठे मनई का पहिचान लेत रहा तौ उ फजर पढ़त रहा, अऊर उ साठ से सौ आयत पढ़त रहा'।