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इस्लाम अल-हक़: क़ुरआन और हदीस
(सच्चा इस्लाम)



इमाम बुखारी : 2000

حَدَّثَنَا سَعِيدُ بْنُ عُفَيْرٍ قَالَ حَدَّثَنِي اللَّيْثُ قَالَ حَدَّثَنِي عُقَيْلٌ عَنْ ابْنِ شِهَابٍ قَالَ أَخْبَرَنِي عَامِرُ بْنُ سَعْدٍ أَنَّ أَبَا سَعِيدٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ أَخْبَرَهُأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ نَهَى عَنْ الْمُنَابَذَةِ وَهِيَ طَرْحُ الرَّجُلِ ثَوْبَهُ بِالْبَيْعِ إِلَى الرَّجُلِ قَبْلَ أَنْ يُقَلِّبَهُ أَوْ يَنْظُرَ إِلَيْهِ وَنَهَى عَنْ الْمُلَامَسَةِ وَالْمُلَامَسَةُ لَمْسُ الثَّوْبِ لَا يَنْظُرُ إِلَيْهِ

हमें बताया गया है [सईद बिन उफैर] ने कहा, मुझे बताया है [अल लैत्स] ने कहा, मुझे बताया है [उकैल] [इब्न सय्यहाब] ने कहा, मुझे बताया है [अमीर बिन सआद] कि [अबू सईद रदियलल्लाहु अन्हु] ने उनसे कहा कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने मुनाबदज़ाह को मना किया है, जो कि किसी व्यक्ति द्वारा खरीद के सबूत के रूप में अपने कपड़े फेंकना है (यह कहकर कि अगर आप इसे छूते हैं तो इसका मतलब है कि लेनदेन हुआ है) दूसरे व्यक्ति द्वारा इसे स्वीकार करने या इसे देखने से पहले और उन्होंने मुलामासाह को भी मना किया है, जो कि बिना देखे केवल कपड़े को छूकर कपड़ा बेचना है (यानी एक शर्त के साथ उदाहरण के लिए अगर आप इसे छूते हैं तो इसका मतलब है कि आपको खरीदना है) "।