Imam Nasa'i : 479
أَخْبَرَنَا عَمْرُو بْنُ يَزِيدَ قَالَ حَدَّثَنَا بَهْزُ بْنُ أَسَدٍ قَالَ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ قَالَ أَخْبَرَنِي الْحَكَمُقَالَ صَلَّى بِنَا سَعِيدُ بْنُ جُبَيْرٍ بِجَمْعٍ الْمَغْرِبَ ثَلَاثًا بِإِقَامَةٍ ثُمَّ سَلَّمَ ثُمَّ صَلَّى الْعِشَاءَ رَكْعَتَيْنِ ثُمَّ ذَكَرَ أَنَّ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عُمَرَ فَعَلَ ذَلِكَ وَذَكَرَ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَعَلَ ذَلِكَ
हमका [अम्र बिन यजीद] सूचित कइके उ कहिन; हमका [बहाज बिन असद] बताय के बाद उ कहिन; हमका [शुबा] बताइके उ कहिन; मोका [अल हकाम] उपदेश देय के बाद उ कहिन; ' [सैद बिन जुबैर] मुजदलिफा मा हमरे साथ मगरिब नमाज पढ़िन तीन रकात एक इकाम के साथ, फिर नमस्कार। फिर ईशा के दुइ रकात पढ़ौ। फिर उ बताइन कि [अब्दुल्लाह बिन उमर] वइसन किहिन, अऊर उ -अब्दुल्लाह बिन उमर- बताइन कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम भी वइसन किहिन।