इमाम नसाई : 420
أَخْبَرَنَا عَلِيُّ بْنُ حُجْرٍ قَالَ حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ مُسْهِرٍ عَنْ هِشَامِ بْنِ عُرْوَةَ عَنْ أَبِيهِ عَنْ عَائِشَةَ قَالَتْكَانَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِذَا اغْتَسَلَ مِنْ الْجَنَابَةِ غَسَلَ يَدَيْهِ ثُمَّ تَوَضَّأَ وُضُوءَهُ لِلصَّلَاةِ ثُمَّ يُخَلِّلُ رَأْسَهُ بِأَصَابِعِهِ حَتَّى إِذَا خُيِّلَ إِلَيْهِ أَنَّهُ قَدْ اسْتَبْرَأَ الْبَشَرَةَ غَرَفَ عَلَى رَأْسِهِ ثَلَاثًا ثُمَّ غَسَلَ سَائِرَ جَسَدِهِ
[अली बिन हुज्र] ने हमें बताया है कि उन्होंने कहा: [अली बिन मुशीर] ने हमें [हिशाम बिन उरवाह] से [अपने पिता] [आयशा] रदलिअल्लाहुअन्हा से बताया है कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम। जब वह जनाबत के लिए नहाते थे, तो वह अपने हाथ धोते थे, फिर नमाज़ की तरह वज़ू करते थे। फिर वह अपनी उंगलियों से अपने बालों के बीच के गैप को साफ़ करते थे, जब तक कि ऐसा न लगे कि उन्होंने अपने सिर पर तीन बार पानी डाला है, फिर अपने शरीर के सभी हिस्सों को धोते थे।