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ISLAM AL-HAQ: QURAN & HADITH
(The True Islam)



Hukum tentang memakan hasil buruan anjing terlatih dan panah yang dilepaskan dengan menyebut nama Allah

Imam Bukhari : 1913

حَدَّثَنَا أَبُو الْوَلِيدِ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ قَالَ أَخْبَرَنِي عَبْدُ اللَّهِ بْنُ أَبِي السَّفَرِ عَنْ الشَّعْبِيِّ عَنْ عَدِيِّ بْنِ حَاتِمٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَسَأَلْتُ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ عَنْ الْمِعْرَاضِ فَقَالَ إِذَا أَصَابَ بِحَدِّهِ فَكُلْ وَإِذَا أَصَابَ بِعَرْضِهِ فَقَتَلَ فَلَا تَأْكُلْ فَإِنَّهُ وَقِيذٌ قُلْتُ يَا رَسُولَ اللَّهِ أُرْسِلُ كَلْبِي وَأُسَمِّي فَأَجِدُ مَعَهُ عَلَى الصَّيْدِ كَلْبًا آخَرَ لَمْ أُسَمِّ عَلَيْهِ وَلَا أَدْرِي أَيُّهُمَا أَخَذَ قَالَ لَا تَأْكُلْ إِنَّمَا سَمَّيْتَ عَلَى كَلْبِكَ وَلَمْ تُسَمِّ عَلَى الْآخَرِ

म्हानै बतायो है [अबू अल वलिद] म्हानै बतायो है [स्यूबाह] कह्यो, म्हानै बतायो है [अब्दुल्लाह बिन अबू अस-सफर] सूं [अश-स्याबी] सूं ['अदिय बिन हातिम रदलियाअल्लाहु 'अन्हू] कह्यो: मैं पैगम्बर सल्लल्लाहु 'अलेहि वसल्लम सूं तीर खेल रै बारै में पूछ्यो कै जानवरां माथै तीर लाग्या, तो मैं जवाब दियो: शिकार रा जानवर आपरी तीखी लोह री नोक रै साथै फेर बांनै खाओ। अर जे इणनै धार सूं मार दियो जावै अर शिकार रो जानवर मर जावै तो इणनै मत खावो क्यूंकै इणरो मतलब है लाश क्यूंकै इणनै तीर री तीखी नोक सूं नीं मार्यो जावै। मैं बोल्यो: 'हे अल्लाह रा रसूल, मैं आपरै शिकार करियोड़ा कुत्ते नै बासमाला कैय'र छोड दियो फेर म्हनैं ठाह लाग्यो कै शिकार करियोड़ा जानवर माथै एक दूजो कुत्तो है जिणनैं म्हैं बसमाला नीं पढ़ी अर म्हनैं ठा नीं है कै दो कुत्तां मांय सूं कुण शिकार करियोड़ा जानवर नैं मार दियो'। तो पैगम्बर सल्लल्लाह अलैहि वसल्लम कह्यो: 'इणनै मत खाओ, क्यूंकै थै आपरै कुत्ते नै नमस्कार पढ़ो अर दूजा कुत्तां नै नीं'।

Hadith Corroboration :

Imam Ahmad : 17067, 17071, 17544, 17547, 17554, 18562, 18563, 18574, 18579, 18580, 18581, 18582
Imam Bukhari : 1913, 5054, 5061, 5062, 5064, 6848
Imam Muslim : 3560, 3561, 3562, 3563, 3564, 3565, 3566
Imam Abu Dawud : 2464, 2465, 2469, 2471
Imam Tirmidzi : 1384, 1389, 1390, 1391
Imam Nasa'i : 4190, 4191, 4192, 4194, 4197, 4198, 4199, 4200, 4201, 4222, 4224, 4225, 4231, 4232, 4233, 4234
Imam Ibnu Majah : 3199, 3205
Imam Darimi : 1924