Imam Tirmidzi : 3256
حَدَّثَنَا عَبَّاسُ بْنُ عَبْدِ الْعَظِيمِ الْعَنْبَرِيُّ حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّزَّاقِ أَخْبَرَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ بَحِيرٍ عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ وَهُوَ ابْنُ يَزِيدَ الصَّنْعَانِيُّ قَال سَمِعْتُ ابْنَ عُمَرَ يَقُولُقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَنْ سَرَّهُ أَنْ يَنْظُرَ إِلَى يَوْمِ الْقِيَامَةِ كَأَنَّهُ رَأْيُ عَيْنٍ فَلْيَقْرَأْ إِذَا الشَّمْسُ كُوِّرَتْ وَإِذَا السَّمَاءُ انْفَطَرَتْ وَإِذَا السَّمَاءُ انْشَقَّتْهَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ غَرِيبٌ وَرَوَى هِشَامُ بْنُ يُوسُفَ وَغَيْرُهُ هَذَا الْحَدِيثَ بِهَذَا الْإِسْنَادِ وَقَالَ مَنْ سَرَّهُ أَنْ يَنْظُرَ إِلَى يَوْمِ الْقِيَامَةِ كَأَنَّهُ رَأْيُ عَيْنٍ فَلْيَقْرَأْ إِذَا الشَّمْسُ كُوِّرَتْ وَلَمْ يَذْكُرْ وَإِذَا السَّمَاءُ انْفَطَرَتْ وَإِذَا السَّمَاءُ انْشَقَّتْ
हमरा सब के कहलक अछि [अब्बास बिन अब्दुल अझिम अल अनबरी] हमरा सब के कहलक अछि [अब्दुर रज्जाक] हमरा सब के [अब्दुल्लाह बिन बहिर] के [अब्दुर रहमान अर्थात इब्न यजीद अश शान'नी] स कहलक अछि, ओ कहलनि; हम [इब्न उमर] के कहैत सुनलहुं; रसुलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहलनि जे, जे कियो क़यामत के दिन के एना देखय चाहैत अछि जेना आँखि स देखय चाहैत अछि, ओकरा ई आयत पढ़बाक चाही: इद्जास्यस्यामसु कुविरात, इद्जास समाउनफथरात, आ इदजस समाउंस्याक्कात। ई हदीस हसन घरीब हदीस छै, आरू [हिसियाम बिन यूसुफ] आरू अन्य लोगऽ न॑ ई हदीस क॑ ई सनाद के साथ बतैन॑ छै । ओ कहलनि : 'जे कियो कयामतक दिन केँ एना देखय चाहैत अछि जेना ई आँखिक दृष्टि हो, तखन ओकरा पढ़बाक चाही: इद्जसस्यम्सु कुवविरात, आ ओ इद्जास समाउन फथरत आ इद्जस समाउन स्यक्कात केर जिक्र नहि करैत छथि'।