Imam Tirmidzi : 1502
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ حَدَّثَنَا أَبُو دَاوُدَ عَنْ عِمْرَانَ الْقَطَّانِ عَنْ قَتَادَةَ عَنْ يَزِيدَ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ هُوَ ابْنُ الشِّخِّيرِ عَنْ عِيَاضِ بْنِ حِمَارٍأَنَّهُ أَهْدَى لِلنَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ هَدِيَّةً لَهُ أَوْ نَاقَةً فَقَالَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَسْلَمْتَ قَالَ لَا قَالَ فَإِنِّي نُهِيتُ عَنْ زَبْدِ الْمُشْرِكِينَقَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ وَمَعْنَى قَوْلِهِ إِنِّي نُهِيتُ عَنْ زَبْدِ الْمُشْرِكِينَ يَعْنِي هَدَايَاهُمْ وَقَدْ رُوِيَ عَنْ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَنَّهُ كَانَ يَقْبَلُ مِنْ الْمُشْرِكِينَ هَدَايَاهُمْ وَذُكِرَ فِي هَذَا الْحَدِيثِ الْكَرَاهِيَةُ وَاحْتَمَلَ أَنْ يَكُونَ هَذَا بَعْدَ مَا كَانَ يَقْبَلُ مِنْهُمْ ثُمَّ نَهَى عَنْ هَدَايَاهُمْ
[मुहम्मद बिन बस्स्यार] हमरा सब के कहने छथि, [अबू दाऊद] हमरा सब के [इमरान अल कथथान] स [कतादाह] स [यजीद बिन अब्दुल्लाह] स - यानी इब्न अश शेखखिर - [इयाद बिन हिमार] स कहने छथि जे ओ एक बेर हुनका उपहार देने छलाह, या हुनका एकटा ऊंट देने छलाह | तखन नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहलनि जे, की अहाँ मुसलमान बनि गेल छी? ओ उत्तर देलनि, 'एखन धरि नहि।' ओ कहलनि: हमरा मुश्रिक लोकनि सँ वरदान स्वीकार करब मना अछि।' अबू ईसा कहलनि जे ई हदीस हसन सहीह अछि। जबकि नबी केरऽ वचन केरऽ अर्थ ‘हमरा मुश्रिकऽ स॑ वरदान स्वीकार करना मना छै,’ यानी ओकरऽ वरदान स्वीकार करना । नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम स सेहो रिवायत अछि, जे एक बेर हुनका मुश्रिक स उपहार भेटैत छल। हदीस में "मकरूह" शब्द के उल्लेख छै, ई संकेत करै छै कि ई संभावना छै कि एक बार वू हुनकऽ वरदान स्वीकार करी लेलकै आरू ओकरा बाद ओकरा मना करी देलकै ।