Imam Bukhari : 1689
حَدَّثَنَا إِسْحَاقُ حَدَّثَنَا رَوْحٌ حَدَّثَنَا شِبْلٌ عَنْ ابْنِ أَبِي نَجِيحٍ عَنْ مُجَاهِدٍ قَالَ حَدَّثَنِي عَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ أَبِي لَيْلَى عَنْ كَعْبِ بْنِ عُجْرَةَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُأَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ رَآهُ وَأَنَّهُ يَسْقُطُ عَلَى وَجْهِهِ فَقَالَ أَيُؤْذِيكَ هَوَامُّكَ قَالَ نَعَمْ فَأَمَرَهُ أَنْ يَحْلِقَ وَهُوَ بِالْحُدَيْبِيَةِ وَلَمْ يَتَبَيَّنْ لَهُمْ أَنَّهُمْ يَحِلُّونَ بِهَا وَهُمْ عَلَى طَمَعٍ أَنْ يَدْخُلُوا مَكَّةَ فَأَنْزَلَ اللَّهُ الْفِدْيَةَ فَأَمَرَهُ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَنْ يُطْعِمَ فَرَقًا بَيْنَ سِتَّةٍ أَوْ يُهْدِيَ شَاةً أَوْ يَصُومَ ثَلَاثَةَ أَيَّامٍوَعَنْ مُحَمَّدِ بْنِ يُوسُفَ حَدَّثَنَا وَرْقَاءُ عَنْ ابْنِ أَبِي نَجِيحٍ عَنْ مُجَاهِدٍ أَخْبَرَنَا عَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ أَبِي لَيْلَى عَنْ كَعْبِ بْنِ عُجْرَةَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ رَآهُ وَقَمْلُهُ يَسْقُطُ عَلَى وَجْهِهِ مِثْلَهُ
हमसे कहिन है [इशाक] हमसे कहिन है [रौह] ने हमसे कहा है [सैबिल] से [इब्न अबू नजीह] से [मुजाहिद] कहिन, हमसे [अब्दुर्रहमान बिन अबू लैला] से [काअब बिन उजरा रदलियाअल्लाहु अनहू] से कहिन है कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि सल्लाहु सल्लाहु सल्लाहु सल्लाहु सल्लाहु सल्लाह के साथ उनके चेहरे पर बहुत कुछ गिरत रहे। उन्होंने पूछा: 'शायद आपके पास कीड़े-मथा पर जूँ-?'। उ जवाब दिहिन: 'ठीक है'। यहिसे उ ओका आपन माथा मुंडवावै का आदेश दिहिन। उ समय उ हुदैबिया मा रहा अऊर अबहीं तक ओनका ई नाहीं समझाइस रहा कि ओनका वहिके रहय का है जबकि उ सचमुच चाहत रहा कि उ मक्का मा घुस सकै। तौ अल्लाह फिदिया के बारे मा आयत का उतारिन। त रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने ओनका फरक -तीन शा'- या बकरी के साथ बलिदान या तीन दिन के रोजा रखै के आदेश दिहिन। और [मुहम्मद बिन यूसुफ] ने हमसे [वारका] से [इब्नू अबू नजीह] से [मुजाहिद] ने हमसे [अब्दुर्रहमान बिन अबू लैला] से [काअब बिन उजराह रदलियाहु अनहू] से कहा है कि रसूलल्लाह शल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने उन्हें देखा - काअब बिन उल्लाहुलाहुलाहुलाहुलाहुलाहुलाहुलाहुलाहुलाहू से अपने चेहरे पर - जूँ गिरत अहै, अऊर ऊपर के तरह जारी अहै।