Imam Abu Dawud : 4490
حَدَّثَنَا عُثْمَانُ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ حَدَّثَنَا جَرِيرٌ عَنْ الْأَعْمَشِ عَنْ الْمَعْرُورِ بْنِ سُوَيْدٍ قَالَرَأَيْتُ أَبَا ذَرٍّ بِالرَّبَذَةِ وَعَلَيْهِ بُرْدٌ غَلِيظٌ وَعَلَى غُلَامِهِ مِثْلُهُ قَالَ فَقَالَ الْقَوْمُ يَا أَبَا ذَرٍّ لَوْ كُنْتَ أَخَذْتَ الَّذِي عَلَى غُلَامِكَ فَجَعَلْتَهُ مَعَ هَذَا فَكَانَتْ حُلَّةً وَكَسَوْتَ غُلَامَكَ ثَوْبًا غَيْرَهُ قَالَ فَقَالَ أَبُو ذَرٍّ إِنِّي كُنْتُ سَابَبْتُ رَجُلًا وَكَانَتْ أُمُّهُ أَعْجَمِيَّةً فَعَيَّرْتُهُ بِأُمِّهِ فَشَكَانِي إِلَى رَسُولِ اللَّهِ فَقَالَ يَا أَبَا ذَرٍّ إِنَّكَ امْرُؤٌ فِيكَ جَاهِلِيَّةٌ قَالَ إِنَّهُمْ إِخْوَانُكُمْ فَضَّلَكُمْ اللَّهُ عَلَيْهِمْ فَمَنْ لَمْ يُلَائِمْكُمْ فَبِيعُوهُ وَلَا تُعَذِّبُوا خَلْقَ اللَّهِ
हमसे कहिन है [उथमान बिन अबू स्याबा] कहिन, हमसे [जरीर] से [अल अमासी] से [अल म'रूर बिन सुवैद] कहिन हैं; हम [अबू धर] का रबादजाह मा एक मोटा मखमली कपड़ा पहिन के देखेन, जबकि ओकर गुलाम भी उहै कपड़ा पहिन के रहा। लोग कहिन, 'हे अबू ज़ार, अगर तुम अपने गुलाम के पहने कपड़ा का लइके पहिन लेब, तौ उ निश्चित रूप से गहना बन जाई, फिर तुम अपने गुलाम का दूसर पोशाक देब'। अबू ज़ार कहिन, 'मैं एक बार एक आदमी का पकड़ लिहे रहेन, जबकि ओकर महतारी एक औरत रही 'अजम -गैर अरब-। फिर हम ऊ मनई का ओकरे महतारी के साथे बदल दिहेन। तब उ व्यक्ति रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से मोर बारे मा शिकायत किहिन, उ कहिन: 'हे अबू ज़ार, तुम एक अइसन मनई हौ जेकरे पास अबहियों जाहिलिया के अवशेष हैं'। उ आगे कहिन: 'ई तोहरे भाई हैं, अल्लाह तोहका ओनके ऊपर पसंद किहिन हैं। तौ जे तोहार भलाई नाहीं करत है, ओनमा से जे भी तोहका बेचै का चाही, अऊर अल्लाह के प्राणी का यातना न देई'।