Imam Abu Dawud : 4274
حَدَّثَنَا نَصْرُ بْنُ عَلِيٍّ أَخْبَرَنَا سُفْيَانُ عَنْ الزُّهْرِيِّ ح و حَدَّثَنَا مُسَدَّدٌ حَدَّثَنَا إِسْمَعِيلُ ح و حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ مُحَمَّدِ بْنِ شَبُّوَيْهِ الْمَرْوَزِيُّ حَدَّثَنَا عَبْدُ الْرَّزَّاقِ أَخْبَرَنَا مَعْمَرٌ عَنْ الزُّهْرِيِّ عَنْ حُمَيْدِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ عَنْ أُمِّهِأَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ لَمْ يَكْذِبْ مَنْ نَمَى بَيْنَ اثْنَيْنِ لِيُصْلِحَ وَقَالَ أَحْمَدُ بْنُ مُحَمَّدٍ وَمُسَدَّدٌ لَيْسَ بِالْكَاذِبِ مَنْ أَصْلَحَ بَيْنَ النَّاسِ فَقَالَ خَيْرًا أَوْ نَمَى خَيْرًا
हमसे कहिन [नशर बिन अली] कहिन, हमसे [सुफयान] [अज जुहरी] से कहिन। -एक अउर पंक्ति मा कहा गा है- हमसे कहिस है [मुसद्दाद] कहिन है, हमसे कहिस है [इस्माइल]। -दूसरे तरीका से ई कहा गा है- हमसे बतावा गा है [अहमद बिन मुहम्मद बिन शैब्बुवैह अल मरवाजी] कहिन, हमसे बतावा गा है [अब्दुर्राजाक] कहिन, हमका [मा'मर] से [अज जुहरी] से [हुमेद बिन अब्दुर्रहमान] से [उनकी महतारी] से बतावा गा है कि पैगम्बर सल्लल्लाह सल्लल्लाह सल्लल्लाह कहिन: 'अइसन नाहीं कहा जात है कि झूठ उ मनई बोलत है जे दुइ मनई के बीच मेल मिलाप करै के ताईं झूठ बोलत है'। अहमद बिन मुहम्मद और मुसद्दाद ने कहा कि 'जब कोऊ दुइ जने के बीच मा सुधार करत है, ऊ कुछ नीक बोलत है या केहू के नीक बातन का आगे बढ़ावत है तौ झूठ बोलब नाहीं कहा जात है'।