Imam Abu Dawud : 4237
حَدَّثَنَا حَيْوَةُ بْنُ شُرَيْحٍ الْمِصْرِيُّ حَدَّثَنَا بَقِيَّةُ عَنْ ابْنِ ثَوْبَانَ عَنْ أَبِيهِ عَنْ مَكْحُولٍ عَنْ وَقَّاصِ بْنِ رَبِيعَةَ عَنْ الْمُسْتَوْرِدِ أَنَّهُ حَدَّثَهُأَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ مَنْ أَكَلَ بِرَجُلٍ مُسْلِمٍ أَكْلَةً فَإِنَّ اللَّهَ يُطْعِمُهُ مِثْلَهَا مِنْ جَهَنَّمَ وَمَنْ كُسِيَ ثَوْبًا بِرَجُلٍ مُسْلِمٍ فَإِنَّ اللَّهَ يَكْسُوهُ مِثْلَهُ مِنْ جَهَنَّمَ وَمَنْ قَامَ بِرَجُلٍ مَقَامَ سُمْعَةٍ وَرِيَاءٍ فَإِنَّ اللَّهَ يَقُومُ بِهِ مَقَامَ سُمْعَةٍ وَرِيَاءٍ يَوْمَ الْقِيَامَةِ
हमसे कहिन है [हैवाह बिन सुरैह अल मिश्री] कहिन, हमसे [बकिया] से [इब्न त्सौबन] से [उनके पिता] से [मखुल] से [वक्काश बिन रबीअह] से [अल मुस्तौरिद] से कहिन कि उ उनसे कहिन कि पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कहिन: है, अपने दुश्मन के सामने अपने मुस्लिम दोस्त के गरिमा के बारे में बात करत है काहे से कि उ ओसे भोजन के उम्मीद करत है, फिर अल्लाह ओका नरक के नरक मा बस वइसने ही खिलाई। जे मुसलमान के कपड़ा पहिरत है - अपने दुश्मन से कपड़ा के सौगात पावै के चक्कर मा अपने दोस्त के घमंड के बात करत है - अल्लाह भी ओका नरक के नरक मा उहै कपड़ा पहिराई। और जो कोई भी अपने आप को किसी और के स्थान पर रखता है काहे से कि ऊ घमंडी है और तारीफ चाहत है, तो क़ामत के दिन अल्लाह ओका घमंडी और तारीफ चाहत है -यातना स्वीकार करै में-' के स्थिति में रख देई।